फिल्म फेस्टिवल का दूसरा दिन रहा मनोरंजन भरपूर

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फरीदाबाद : इंडॉगमा फिल्म फेस्टिवल (IFF) के फिल्मों की स्क्रीनिंग के दूसरा दिन मनोरंजन से भरपूर रहा। भारी संख्या में वाईएमसीए के छात्रों एवं प्रोफेसरों ने इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। स्क्रीनिंग के दुसरे दिन 8 शॉर्ट फिल्में दिखाई गईं।
स्क्रीनिंग में मौजूद सभी कॉलेज के स्टूडेंट्स व सभी दर्शकों ने फिल्मों का भरपूर आनंद उठाया और फिल्मों के प्रोड्यूसर, डायरेक्टर एवं कलाकारों से रूबरू होकर सवाल भी पूछे। स्क्रीनिंग के दूसरे दिन की ज्यूरी – सिनेमैटोग्राफर मनीश रॉय, आर्ट डायरेक्टर शमीम आलम और डायरेक्टर जतिंदर शर्मा ने फेस्टिवल में आई हुई फिल्मों के स्तर को सराहा। फेस्टिवल के आयोजक मुकेश गंभीर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस फेस्टिवल का एक ही मकसद है कि नवोदित कलाकारों को पता चले किस प्रकार से कम संसाधनों में भी अच्छी फिल्म बनाई जा सकती है।
राजेश्वर कौशिक द्वारा निर्मित “अर्जी” खास तौर से लोगों के दिलों को छू गई। इस फिल्म में ‘सैनिक क्यों बिना लड़ाई के शहीद हो जाते हैं’ को प्रभावशाली रूप से स्क्रीन पर उतारा गया। सभी कलाकारों का प्रदर्शन बहुत ही सराहनीय रहा। सौभाग्य से सभागार में उपस्थित दर्शकों को फिल्म के मुख्य कलाकार एवं निर्माता राजेश्वर कौशिक से सवाल पूछने का मौका भी मिला। खन्ना मूवीज के बैनर तले बनी ‘आफ्टर ग्लो’ भी दर्शकों पर अपना असर छोड़ गई। एक और फिल्म सीक्रेट मैसेज ज्योति प्रकाश द्वारा निर्मित फिल्म ने भी खूब वाही-वाही जुटाई। सभी कलाकारों की मेहनत सफलतापूर्वक स्क्रीन पर नजर आ रही थी।
5 दिन तक चलने वाली फेस्टिवल की स्क्रीनिंग में वाईएमसीए के लेक्चरर और छात्रों का विशेष योगदान है। सभी छात्र वॉलिंटियर के रूप में इस फेस्टिवल से जुड़े हुए हैं और उनकी दिन-रात की मेहनत पहले दिन से ही नज़र आने लगी है। अतिथि स्वागत, ज्यूरी का मान-सम्मान, मंच संचालन एवं जलपान तक की सारी व्यवस्था इन्हीं छात्रों ने, डॉ. पूनम सिंघल और प्रो. तरुणा नरूला के मार्गदर्शन में बड़ी ही दक्षता से निभाई।
पहले दिन की स्क्रीनिंग में फरीदाबाद शहर के कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे जिनमें एनजीएफ पलवल कॉलेज के अश्विनी प्रभाकर, लोक अदालत के सदस्य एसके सचदेवा, संदीप मक्कड़, मोहित भंडारी, रेणुका यादव, कप्तान नाहर, अरविन्द शर्मा, आदि गणमान्य शामिल रहे। वहीँ फिल्मों की सफल स्क्रीनिंग का संचालन सिनेमेहता प्रोडक्शन की कविता वाकची ने बखूबी संभाला और चंदन मेहता ने शहर के सभी कॉलेज एवं छात्रों को मंच से निमंत्रण भी दिया कि वह भारी संख्या में उपस्थित होकर स्क्रीनिंग एवं फेस्टिवल को सफल बनाएं।

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