अच्छे समय में ही होती हैं सबसे बड़ी गलतियां: राकेश

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नई दिल्ली:  राकेश झुनझुनवाला ने सिर्फ 5,000 रुपये से निवेश की शुरुआत की थी और आज उनका साम्राज्य अरबों रुपये का है। पिछले कुछ दशकों में झुनझुनवाला ने देश के सबसे अमीर और स्मार्ट स्टॉक मार्केट इन्वेस्टर और ट्रेडर के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

उन्हें अक्सर ‘भारत का वॉरन बफेट’ और ‘बिग बुल ऑफ दलाल स्ट्रीट’ कहा जाता है। हाल ही में हुए इकनॉमिक कॉनक्लेव में झुनझुनवाला ने कहा, ‘ट्रेडिंग बहुत फास्ट ऐक्टिविटी है। अगर मुझे विकल्प दिया जाए तो मैं अपने सारे पैसे ट्रेडिंग से निकालना चाहूंगा, लेकिन यह संभव नहीं है। आप इसमें पैसे गंवाते भी हैं। मैंने कई बार पैसा गंवाया है। ट्रेडिंग आसान नहीं है।’

स्टॉक मार्केट के उतार-चढ़ाव से वाकिफ झुनझुनवाला ने बताया कि कैसे उन्होंने ‘1992 में शॉर्ट सेलिंग से खूब पैसा’ बनाया। उन्होंने कहा, ‘हमने 40 से 100 के बीच शॉर्ट सेलिंग शुरू की। इसके बाद मिस्टर माय्या (उस समय बीएसई के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर) ने मुझे बुलाया और मेरा बैज वापस लेने की धमकी दी। उन्होंने मुझे 3,500 पर बुलाया और फिर 3,000 पर। आखिरकार, जब इंडेक्स 2,200 पर था तो मैंने उनसे कहा कि मिस्टर मय्या अगर हर स्टेज में मुझे हटाने की जगह आप मेरे साथ शामिल हो गए होते, तो क्या आपको ज्यादा खुशी नहीं हुई होती?’

राकेश ने हमेशा बुलिश रुख बरकरार रखा। यह उनकी सफलता का बड़ा राज है। उन्होंने बताया, ‘स्टॉक मार्केट में 98 पर्सेंट पैसे बुल बनकर बनाए जाते हैं। जरूरी नहीं है कि आप बड़े बुल हों, लेकिन आपको बुल तो होना ही चाहिए।’ झुनझुनवाला मार्केट गुरु होने के साथ चार्टर्ड अकाउंटैंट भी हैं। एक सफल ट्रेड-इन्वेस्टर बनने के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, ‘ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग एक तरह से एक पत्नी और एक प्रेमिका को रखने जैसा है। आप दोनों को संभाल सकते हैं, लेकिन इसके लिए दोनों को एक दूसरे से दूर रखना पड़ेगा। किसी भी एक को दूसरे के बारे में कुछ पता नहीं चलना चाहिए।’

झुनझुनवाला ने पिछले कुछ सालों में काफी सबक सीखे हैं। जैसे पत्नी या मार्केट से बहस नहीं करना, मार्केट में वोलैटिलिटी की भविष्यवाणी करना बच्चे के रिऐक्शन पता लगाने से भी आसान है और सफलता को हमेशा विनम्रता से स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘आप कहां से आए हैं, इसे मत भूलिए। आप जैसे नहीं हैं, वैसा दिखने की कोशिश बिल्कुल न करें।’ उन्होंने कहा, ‘यह याद रखिए कि सबसे गलत फैसले, सबसे अच्छे समय में होते हैं। अगर हर्षद मेहता के समय में मैं शॉर्ट सेलिंग करके 50 करोड़ कमा सकता तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं हर साल उतने पैसे कमा सकता हूं। इसलिए जब आपको सफलता मिले तो यह न समझें कि वह हमेशा जारी रहेगी। हालांकि, इसे बरकरार रखने की कोशिश जरूर करनी चाहिए।’

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