आतंकी हाफिज सईद को संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक आतंकी घोषित

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इस्लामाबाद :  जैश सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र ने आखिरकार वैश्विक आतंकी घोषित कर ही दिया है। भारत के 10 साल के कूटनीतिक दबाव के बाद मसूद पर बैन संभव हो सका। 10 साल पहले ही संयुक्त राष्ट्र ने मुंबई बम धमाकों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को ग्लोबल आतंकी घोषित किया था। भारत की अपील पर तत्काल कार्रवाई करते हुए यूएन ने 10 दिसंबर 2008 को मुंबई बम धमाके अंजाम देने के कारण हाफिज सईद और उसके संगठन जमात-उद-दावा जो लश्कर-ए-तैयबा का ही पूर्ववर्ती संगठन है को प्रतिबंधित संगठन की सूची में डाला था। हालांकि, अब विश्व जगत की नजर भी इस पर है कि क्या मसूद अजहर अब पाकिस्तान का दूसरा हाफिज सईद होने जा रहा है। यूएन से ब्लैक लिस्ट किए जाने के बाद भी सईद के हालात में कोई बड़े बदलाव नहीं आए। संयुक्त राष्ट्र द्वारा ब्लैक लिस्ट किए जाने के बाद नियम के तहत उसकी संपत्ति सील, यात्रा पर बैन और हथियारों को जब्त किया जाना था। हालांकि, ऐसा कुछ व्यापक स्तर पर होने की सूचना नहीं है।

सईद पाकिस्तान में खुले आम अक्सर घूमते नजर आता है। पाकिस्तान सरकार और सरकारी तंत्रों की तरफ से उसे पर्याप्त समर्थन मिलता रहा है। 2008 में बैन के तत्काल बाद सईद को घर में नजरबंद किया गया था, लेकिन अगले साल जून में लाहौर हाई कोर्ट ने उसकी रिहाई के आदेश दिए। सितंबर 2009 में हाफिज सईद के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया, लेकिन अक्टूबर में लाहौर हाई कोर्ट ने सबूतों के अभावों में फिर उसे छोड़ दिया।

2012 में अमेरिका ने हाफिज सईद पर 10 मिलियन के इनाम का ऐलान किया और उसके संगठन जमात-उद-दावा को ब्लैकलिस्ट किया था। हालांकि, यह बैन और इनाम का ऐलान भी सईद के 2016 तक सामान्य जीवन जीने में कोई बाधा नहीं बना। 2016 में अमेरिका के आतंक के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के दबाव के बाद पाकिस्तान में मुंबई धमाकों के गुनहगार को फिर से घर में नजरबंद किया गया। घर में नजरबंद रहते हुए सईद ने यूएन में अपना नाम प्रतिबंधित आतंकियों की सूची से निकालने की अर्जी दी जो कि खारिज हो गई। 10 महीने बाद ही वह फिर से लाहौर हाई कोर्ट के आदेश के बाद आजाद हो गया।

लाहौर हाई कोर्ट के आदेश के बाद रिहा हुए हाफिज सईद ने एक महीने के अंदर ही अपनी राजनीतिक पार्टी (मिली मुस्लिम लीग) बना ली। हालांकि, वैश्विक विरोध के बाद इस पार्टी को मान्यता नहीं मिली, लेकिन सईद अपने भाषणों में कश्मीर की आजादी का नारा देता रहा। पुलवामा हमले के बाद दुनिया भर में आक्रोश के बाद पाकिस्तान अपने आतंकी संगठनों पर कार्रवाई के लिए मजबूर हो गया। पुलवामा हमले के बाद ही सईद के संगठन जमात-उद-दावा और उसके चैरिटी विंग फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन पर प्रतिबंध लगाया गया।

आतंकी संगठनों पर कार्रवाई का कितना भी दावा पाकिस्तानी सरकारें करती हों, लेकिन उनकी हकीकत कुछ और ही है। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से आतंकी घोषित 118 आतंकियों में से पाकिस्तान के 18 नागरिक हैं। कुल 23 आतंकियों को पाकिस्तान में या तो शरण मिली है या किसी और तरह से इनका जुड़ाव रहा है। ज्यादातर मामलों में आतंकियों पर जब भी कार्रवाई हुई है तो यह अंतरराष्ट्रीय दबाव में ही हुई है। आम तौर पर आतंकियों पर बैन भी कभी बहुत प्रभावी नहीं रहे और वह अपने नेटवर्क के जरिए आतंकी वारदात अंजाम देने में सफल रहे। अब सवाल यही है कि मसूद अजहर के केस में क्या स्थिति इससे कुछ अलग होगी

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