राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना द्वारा देश की संसद को भंग करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बताया अवैध

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कोलंबो : श्री लंका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना द्वारा देश की संसद को भंग करने के फैसले को अवैध ठहराया है।

बता दें कि 26 अक्टूबर को सिरीसेना ने रानिल व्रिकमसिंघे को हटाकर उनकी जगह महिंदा राजपक्षे को देश का प्रधानमंत्री बना दिया था। इसके बाद सिरीसेना ने संसद को भंग कर दिया था और 5 जनवरी को चुनाव कराने की घोषणा की थी
बता दें कि महिंदा राजपक्षे संसद में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए थे। श्री लंका की संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री कार्यालय के राजकोष से खर्च करने के अधिकार पर भी रोक लगा दी थी। यह कदम राजपक्षे के लिए एक बड़ा झटका था।सिरीसेना द्वारा संसद भंग किए जाने और चुनाव की घोषणा के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर को अपने अंतरिम आदेश के तहत रोक लगा दी थी। इस बीच अपदस्थ प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने बुधवार को संसद में स्पष्ट बहुमत साबित कर दिया। बुधवार को संसद में 225 में से 117 सांसदों ने उनके नेतृत्व को लेकर लाए गए विश्वास प्रस्ताव को पारित करने के पक्ष में मतदान किया।

 

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