सेना के लिए गोला बारूद बाने वाले 45 हजार कर्मचारियों की हड़ताल

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नई दिल्ली:  जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच सेना के लिए गोला-बारूद बनाने वाले 45 हजार कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। देश के 41 आर्डिनेंस फैक्टरियों में काम ठप हो चुका है। कॉर्पोरेट, प्राइवेट कंपनी बनाने का आरोप लगाकर कर्मचारियों ने 1 महीने तक हड़ताल की घोषणा की है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने निजीकरण से इनकार किया है। मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि जिस प्रस्ताव पर सरकार विचार कर रही है वह इसे रक्षा क्षेत्र का सार्वजनिक उपक्रम (डीपीएसयू) बनाने का है, जो 100 फीसद सरकारी स्वामित्व वाला होगा।अधिकारी ने कहा, ‘अभी OFB महंगी विदेशी टेक्नॉलजी पर निर्भर है। कॉर्पोरेट एंटिटी बनने पर यह उत्पादन वाले संगठन से टेक्नॉलजी पर आधारित संगठन की ओर बढ़ेगा।’ ऑर्डिनेंस फैक्टरियों के कॉर्पोरेट बनने के बाद उन्हें मॉडर्नाइजेशन और रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट के लिए सरकार से फंडिंग की कम जरूरत होगी और ये फैक्टरियां खुद फंड जुटा सकेंगी। अधिकारी ने बताया, ‘ये फैक्टरिया नए प्रॉडक्ट डिवेलप करने और इंटरनेशनल मार्केट में जाने के लिए भारतीय और विदेशी कंपनियों के साथ टाई-अप भी कर सकती हैं।’

अधिकारियों ने कहा अभी OFB को फैक्टरियों के मॉडर्नाइजेशन और जॉइंट वेंचर के लिए सरकारी नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। इससे क्षमता पर असर पड़ता है। इन फैक्टरियों में 10 करोड़ रुपये के निवेश के लिए भी डिफेंस मिनिस्ट्री की स्वीकृति लेनी होती है, जिससे इनके कामकाज में रुकावट आती है। एक सरकारी विभाग होने के कारण OFB मुनाफा अपने पास नहीं रख सकता। OFB को सशस्त्र बलों को कम कीमत पर प्रॉडक्ट्स की सप्लाई करनी होती है और इस वजह से इसे क्वॉलिटी में सुधार करने का प्रोत्साहन नहीं मिलता। अधिकारी ने कहा कि प्रॉडक्ट्स की डिलीवरी में देरी होने पर OFB के लिए पेनाल्टी भी नहीं है।

ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (OFB) को कॉर्पोरेट बनाए जाने के खिलाफ ऑर्डिनेंस फैक्टरियों में हड़ताल शुरू होने के एक दिन बाद सरकार ने OFB में नए बदलावों को लेकर एक हाई-लेवल कमेटी बनाने का फैसला किया है। अधिकारियों ने बताया कि इसका उद्देश्य OFB में सुधार करना है। नए बदलावों के जरिए ऑर्डिनेंस फैक्टरियों को अधिक जवाबदेह बनाने के साथ ही इनकी उत्पादन क्षमता और एफिशिएंसी को बढ़ाया जाएगा। OFB की 41 ऑर्डिनेंस फैक्टरियां टैंक, बख्तरबंद वाहन, हथियार, गोला-बारूद, टेंट और बूट बनाती हैं। इनके मुख्य ग्राहकों में तीनों सेनाएं और अर्द्धसैनिक बल शामिल हैं। OFB के कामकाज को लेकर पिछले कई वर्षों से आशंकाएं जताई जाती रही हैं। डिफेंस मिनिस्ट्री के अपने 100 दिन के एजेंडा में OFB को बेहतर बनाना शामिल है।

अधिकारियों ने कहा कि OFB को एक या इससे से अधिक 100 पर्सेंट सरकारी हिस्सेदारी वाली एंटिटी बनाने से इसका कामकाज बेहतर होगा। इससे रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट, क्वॉलिटी कंट्रोल और फाइनैंशल अकाउंटिंग जैसे एरिया ऑर्डिनेंस फैक्टरियों के मैनेजमेंट के तहत आ जाएंगे। एक अधिकारी ने बताया, ‘फैक्टरियां अपने मार्केट को बढ़ाने के लिए फैसले ले सकेंगी और उन्हें टेक्नॉलजी अपग्रेड करने में आसानी होगी। इससे डिफेंस सेक्टर में उनकी स्थिति मजबूत होगी।’ इससे डिफेंस सेक्टर में इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करने की सरकार की योजना को मदद मिलेगी और इन फैक्टरियों की उत्पादन क्षमता बढ़ सकेगी।

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