इस्पात के भाव और नीचे आ सकते हैं: फिच सोल्यूशंस

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नई दिल्ली: फिच सोल्यूशंस मैक्रो रिसर्च ने 2019 में इस्पात की वैश्विक कीमतों के बारे में अपने पहले अनुमान को और नरम कर दिया है। एजेंसी का मानना है कि अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में के कमजोर पड़ने का खतरा बढ़ने से उत्साह में कमी का असर इस्पात की वैश्विक कीमतों पर पड़ सकता है। फिच सोल्यूशंस मैक्रो रिसर्च ने मंगलवार को कहा कि दीर्घकाल में कीमतें नरम होंगी और मांग कम होने तथा उत्पादन बढ़ने के साथ बुनियाद कमजोर होने से इसके गिरावट का दौर बने रहने की आशंका है। उसने एक बयान में कहा, ‘‘हमने 2019 के लिये इस्पात की वैश्विक कीमतों को संशोधित करते हुए औसतन 650 डॉलर प्रति टन से कम कर 600 टन कर दिया है। अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था के और नीचे जाने के जोखिम के बीच निवेशकों की धारण कमजोर बनी हुई है।’’ बुनियाद के संदर्भ में बयान में कहा गया है कि चीन में मांग मजबूत बनी हुई है। बुनियादी ढांचा क्षेत्र और निर्माण क्षेत्रों से अच्छी मांग है। इसका कारण लक्षित प्रोत्साहन उपाय हैं। पर इसके साथ इस्पात का उत्पादन भी बढ़ा है।

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