फुस्स हो जाएगा सेबी का नया व्हिसलब्लोअर इन्सेंटिव सिस्टम

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मुंबई:  मार्केट रेगुलेटर सेबी ने व्हिसलब्लोअर को बढ़ावा देने के लिए नई सूचना व्यवस्था अपनाने का प्रस्ताव दिया है। सेबी की इस कवायद का मकसद इनसाइडर ट्रेडिंग का पता लगाना और उसके खिलाफ कार्रवाई करना है। आमतौर पर इनसाइडर ट्रेडिंग को कानूनी तौर पर साबित करना सेबी के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है।

इनसाइडर ट्रेडिंग के मामलों को सही साबित करना सिर्फ सेबी के लिए मुश्किल नहीं है, यह दुनियाभर के कैपिटल मार्केट रेगुलेटर्स के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। उन्हें सबूत जुटाने होते हैं कि कैसे इनसाइडर ने प्राइस सेंसिटिव सूचना हासिल कर पैसे बनाए। इसलिए सेबी ने उन लोगों को बढ़ावा देने का फैसला किया है जो इसकी पुष्टि करने में मददगार हो सकते हैं।

नई व्यवस्था के मुताबिक, व्हिसलब्लोअर सेबी को अहम दस्तावेज सहित सूचना मुहैया करा सकता है जिससे गलत काम करने वालों को कानूनन सजा दिलाई जा सके। मुखबिर की पहचान का खुलासा नहीं किया जाएगा। यहां तक कि गलत काम में शामिल लोग भी सबूत मुहैया कराकर केस को मजबूत बनाने में सेबी के साथ सहयोग कर सकते हैं। बदले में उन्हें छोटी-मोटी सजा ही मिलेगी।

सेबी ने जो व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिया है, वह अमेरिका के सिक्यॉरिटी ऐंड एक्सचेंज कमीशन के सिक्यॉरिटीज एक्सचेंज ऐक्ट के सेक्शन 21एफ जैसा है। यह अमेरिका में खासा कारगर साबित हुआ है और इसके जरिए इनसाइडर ट्रेडिंग में फंसे कई लोगों को कानून के कठघरे में खड़ा किया गया है। कनाडा के ओंटारियो सिक्यॉरिटीज कमीशन ने भी मुखबिर के क्लू पर कई केस सॉल्व किए हैं।

हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेबी की इस व्यवस्था को भारत में उतनी कामयाबी शायद न मिले क्योंकि रेगुलेटर की तरफ से ऐसे मुखबिरों को बढ़ावा देने के मानक अब भी रूढ़िवादी हैं और संबंधित नियम दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा सख्त हैं।

जून में जारी चर्चा पत्र में सेबी ने कहा था कि मुखबिर की खुफिया सूचना पर सरकार जितनी उगाही करेगी, वह उसका 10% रकम पाने का हकदार होगा। हालांकि इसकी ऊपरी लिमिट एक करोड़ रुपये पर फिक्स कर दी गई है। इसके उलट अमेरिका में मुखबिर को बड़ा इनाम मिलता है। मिसाल के लिए SEC ने सितंबर 2018 में दो व्हिसलब्लोअर को एक केस में 61 लोगों से 37.6 करोड़ डॉलर की रकम निकलवाने में मदद के लिए कुल 5 करोड़ डॉलर यानी लगभग 350 करोड़ रुपये दिलाए थे।

जहां तक भारत में व्हिसलब्लोअर को मिलने वाले इंसेंटिव की बात है तो उन्हें शुरुआती इनाम के तौर पर सिर्फ 10 लाख मिलेंगे। बाकी रकम उन्हें केस में रकम की उगाही की कार्रवाई पूरी होने के बाद अदा की जाएगी। यह मुखबिरों का उत्साह ठंडा कर सकता है क्योंकि भारत में कानूनी प्रक्रिया कई बार अंतहीन हो जाती है। इनसाइडर ट्रेडिंग मामलों में सेबी की तरफ से ऑर्डर जारी होने के बाद आरोपियों के पास राहत के लिए सिक्यॉरिटीज अपीलेट ट्राइब्यूनल, हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प होता है।मुंबई
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने व्हिसलब्लोअर को बढ़ावा देने के लिए नई सूचना व्यवस्था अपनाने का प्रस्ताव दिया है। सेबी की इस कवायद का मकसद इनसाइडर ट्रेडिंग का पता लगाना और उसके खिलाफ कार्रवाई करना है। आमतौर पर इनसाइडर ट्रेडिंग को कानूनी तौर पर साबित करना सेबी के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है।

इनसाइडर ट्रेडिंग के मामलों को सही साबित करना सिर्फ सेबी के लिए मुश्किल नहीं है, यह दुनियाभर के कैपिटल मार्केट रेगुलेटर्स के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। उन्हें सबूत जुटाने होते हैं कि कैसे इनसाइडर ने प्राइस सेंसिटिव सूचना हासिल कर पैसे बनाए। इसलिए सेबी ने उन लोगों को बढ़ावा देने का फैसला किया है जो इसकी पुष्टि करने में मददगार हो सकते हैं।

 

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