जीडीपी ग्रोथ रेट का पूर्वानुमान घटाकर 6.80% किया

0
352

 

नई दिल्ली : फिच रेटिंग्स ने अगले वित्त वर्ष के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान 7 प्रतिशत से घटाकर 6.80 प्रतिशत कर दिया। वैश्विक स्तर पर काम करने वाली इस रेटिंग एजेंसी ने अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कहा, ‘हालांकि हमने अर्थव्यवस्था में उम्मीद से कमतर तेजी के कारण अगले वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान कम किया है। इसके बाद भी देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वित्त वर्ष 2019-20 में 6.8 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2020-21 में 7.10 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा।’ बेस रेट में 0.25% की और कटौती
फिच ने पिछले साल दिसंबर में चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया था। फिच ने कहा, ‘हमने बेस रेट के बारे में अपना आउटलुक बदला है। हमें पहले की आशंका के मुकाबले आसान वैश्विक मौद्रिक परिस्थितियां तथा मुद्रास्फीति के दायरे में रहने के कारण बेस रेट में 0.25 प्रतिशत की एक और कटौती की उम्मीद है।इसलिए सुस्त पड़ी वृद्धि दर
इसने कहा कि भारत की जीडीपी ग्रोथ जुलाई-सितंबर तिमाही में 7 प्रतिशत और अप्रैल-जून तिमाही में 8 प्रतिशत की ऊंचाई पर रहने के बाद लगातार दो तिमाहियों में थोड़ी कमजोर पड़ गई और अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 6.6 प्रतिशत रही। फिच ने कहा, ‘मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और कुछ हद तक कृषि क्षेत्र की गतिविधियों की रफ्तार घटने से जीडीपी ग्रोथ सुस्त पड़ी है।’ इसने कहा कि जो कर्ज के लिए मुख्य रूप से नॉन-बैंकिंग फाइनैंशल कंपनियों (NBFCs) पर निर्भर थे, उन्हें झटका लगा है। इस वजह से कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री घटी हैं। साथ ही, पिछले वर्ष खाद्य महंगाई नकारात्मक स्तर पर चली गई जिससे किसानों की आमदनी घटी।

फिच के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया दिसंबर 2019 तक 72 जबकि दिसंबर 2020 तक 73 के स्तर पर जा सकता है जो दिसंबर 2018 के आखिर में 69.82 के स्तर पर था। इसने कहा कि वित्तीय और मौद्रिक नीतियां वृद्धि दर को बढ़ावा देने वाली हैं और आरबीआई ने भी पिछले महीने की मौद्रिक समीक्षा में बेस रेट 0.25 प्रतिशत घटा दिया। फिच ने कहा, ‘हम अपने रेट आउटलुक को बदला है और अब इस वर्ष और 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की उम्मीद करते हैं।’

एजेंसी ने वैश्विक जीडीपी की वृद्धि दर का अनुमान भी कम किया है। एजेंसी ने वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान 2018 के लिए 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3.2 प्रतिशत और 2019 के लिए 3.1 प्रतिशत से घटाकर 2.8 प्रतिशत कर दिया। फिच ने चीन के लिए पूर्वानुमान 2018 में 6.6 प्रतिशत और 2019 में 6.1 प्रतिशत पर बनाए रखा। एजेंसी ने कच्चे तेल में भी नरमी का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। उसका कहना है कि कच्चा तेल 2018 के 71.60 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में गिरकर 2019 में करीब 65 डॉलर प्रति बैरल और 2020 में 62.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here