तीन महीने से निष्क्रिय है पाकिस्तान का मानवाधिकार आयोग

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इसके शीर्ष पदाधिकारियों का कार्यकाल पूरा होने की वजह से तीन महीने से अधिक समय से निष्क्रिय पड़ा है, जबकि देश कश्मीर में भारत पर लगातार मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगा रहा है।  आयोग के कर्मचारियों को डर है कि प्रधानमंत्री इमरान खान और नैशनल असेंबली में नेता विपक्ष शहबाज शरीफ के बीच कटु संबंधों की वजह से हो सकता है कि आयोग अभी और समय तक निष्क्रिय रहे।हालांकि, मानवाधिकार मंत्रालय के महानिदेशक मोहम्मद अरशद ने दैनिक से कहा कि अध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर भर्ती के लिए दोबारा विज्ञापन निकाला जाएगा। नियुक्तियों की समूची प्रक्रिया के पूर्ण होने में छह से सात महीने लग सकते हैं।
पाकिस्तान लगातार भारत पर आरोप लगाता रहा है कि कश्मीर में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है जबकि पाकिस्तान में अंदर से ही हिंसा और सेना के दबाव की आवाज उठती रहती है।

गिलगिट, बाल्टिस्तान और पख्तूनख्वा में सेना की ज्यादती का विरोध वहां के लोग दुनियाभर में करते हैं। पीओके में भी लोगों पर अत्याचार होते हैं। अफगानिस्तान की सीमा के इलाकों में तालिबानियों का राज है। ऐसे में हिंसा आम बात हो गई। यहां तक कि पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री इमरान खान को उनकी ही आवाम इलेक्टेड पीएम नहीं मानती और सिलेक्टड पीएम होने का इल्जाम लगाती है।

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