आवाजों को लेकर हमारा दिमाग सजग बना रहता है।

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किसी से बात करने के साथ ही आसपास की आवाजों को लेकर भी हमारा दिमाग सजग बना रहता है। यही वजह है कि साउंड में आए जरा से बदलाव को भी हम महसूस करते हैं और हमारा ध्यान आवाज के सोर्स की ओर चला जाता है।

सोशल, कॉग्निटिव एंड एफेक्टिव न्यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक हमारा दिमाग उस तरह की आवाज पर ज्यादा जल्दी और तेजी से रिऐक्ट करता है जिसमें गुस्सा या धमकी झलकती हो ताकि संभावित खतरे से बचा जा सके। जिनेवा विश्वविद्यालय (यूएनआईजीई) के शोधकर्ताओं ने दिखाया कि ऐसी स्थिति में हमारा दिमाग कैसी प्रतिक्रियाएं देता है।

यूएनआईजीई में शोधकर्ता लियोनार्डो सेरावोलो ने कहा, “गुस्से में संभावित खतरे का संकेत हो सकता है, यही कारण है कि मस्तिष्क लंबे समय तक इस तरह की उत्तेजना का विश्लेषण करता है।” शोधकर्ताओं ने कहा कि अध्ययन में पहली बार सामने आया कि कुछ सौ मिलीसेकंड में हमारा दिमाग गुस्से वाली आवाजों की उपस्थिति को लेकर संवेदनशील है। सेरावोलो ने कहा, “मुश्किल परिस्थितियों में संभावित खतरे के सोर्स का तेजी से पता लगाना जरूरी है, क्योंकि यह खतरे की स्थिति में महत्वपूर्ण है और हमारे अस्तित्व के लिए काफी फायदेमंद है।”

दृष्टि और श्रवण दो इंद्रियां हैं जो व्यक्ति को खतरनाक परिस्थितियों का पता लगाने की अनुमति देती हैं। किसी के लिए भी चीजों को देखना महत्वपूर्ण होता है, लेकिन यह कानों की तरह आस-पास की जगह के 360 डिग्री कवरेज की अनुमति नहीं देता है। यूएनआईजीई के एक शोधकर्ता निकोलस बुरा ने कहा, “यही कारण है कि हमारी दिलचस्पी इस बात में है कि हमारा ध्यान हमारे आस-पास की आवाजों में अलग-अलग तरह के उतार-चढ़ाव पर कितनी तेजी से जाता है और हमारा मस्तिष्क संभावित खतरनाक परिस्थितियों से कैसे निपटता है।”

 

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