जेट के पास उड़ान भरने के लिए फंड नहीं

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मुंबई : जेट एयरवेज को अगर बैंकों से वादे के मुताबिक हफ्ते भर में 1,500 करोड़ रुपये नहीं मिलते हैं तो वह अप्रैल के बाद कामकाज जारी नहीं रख पाएगी। एक सूत्र ने बताया कि कंपनी के टॉप मैनेजमेंट ने अंदरूनी अनुमान में यह बात कही है। जिन रूल्स के तहत बैंकों ने जेट का रिवाइवल प्लान बनाया था, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मंगलवार को आरबीआई से जुड़े एक फैसले में रद्द कर दिया।

एयरलाइन कंपनी के टॉप मैनेजमेंट ने इस सिलसिले में बैंकों से मुलाकात की और उनसे तस्वीर साफ करने को कहा। शीर्ष अदालत ने लोन डिफॉल्ट पर रिजर्व बैंक के पिछले साल 14 फरवरी को जारी किए गए सर्कुलर को रद्द कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि जेट को अभी तक इस मामले में बैंकों का जवाब नहीं मिला है। इस बीच, जेट के संस्थापक नरेश गोयल ने एयरलाइन से औपचारिक तौर पर बाहर निकलने का ऐलान किया है।

गोयल ने कहा, ‘जेट ने हाल में जो मुश्किलें झेली हैं, मैं नहीं चाहता कि उसकी आंच एंप्लॉयीज पर आए। उनका सिर ऊंचा रहना चाहिए। मैं मानता हूं कि जेट को दुनिया की बेहतरीन एयरलाइन कंपनी बनाने में उनका बहुत बड़ा योगदान है। एंप्लॉयीज और जेट परिवार के हितों के लिए मैं कंपनी का कंट्रोल और सारे पद छोड़ रहा हूं।’ गोयल पहले ही कंपनी के चेयरमैन और बोर्ड से इस्तीफे का ऐलान कर चुके थे।

जेट एयरवेज भारी संकट में है। उसके ज्यादातर प्लेन उड़ान नहीं भर रहे हैं। भारत और विदेशी कर्ज पर वह डिफॉल्ट कर चुकी है। उसने वेंडरों का पैसा नहीं दिया है। एंप्लॉयीज को कंपनी समय पर सैलरी नहीं दे पा रही है और उसने छंटनी भी की है। जेट को कर्ज देने वाले बैंकों ने एसबीआई के नेतृत्व में एक रिजॉल्यूशन प्लान तैयार किया था। इसके तहत वे कंपनी के 50.1 पर्सेंट शेयर हासिल करने के बाद नए निवेशक की तलाश करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार को फैसले के बाद इस प्लान पर सवालिया निशान लग गया है। जेट को पिछले वीकेंड पर 180-200 करोड़ का कर्ज मिला था। यह पैसा दिसंबर की सैलरी और फ्यूल का बकाया चुकाने में चला गया। एक सूत्र ने बताया कि जिन कंपनियों ने जेट ने प्लेन लीज पर लिए थे, उनका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है।

ऊपर जिस सूत्र का जिक्र किया गया है, उन्होंने कहा, ‘जिन कंपनियों ने जेट को किराये पर प्लेन दिए थे, वे बकाए का बड़ा हिस्सा मांग रहे हैं। जब वे जेट को प्लेन का इस्तेमाल बंद करने को कहती हैं तो उसे उनकी बात माननी पड़ती है। जब तक कंपनी के अधिक प्लेन उड़ान नहीं भरेंगे, तब तक उसके पास कैश भी नहीं बढ़ेगा।’

कंपनी बुधवार तक 26 प्लेन से कामकाज कर रही थी, जिनकी संख्या मंगलवार को 29 थी। हालांकि, मेंटेनेंस की वजह से कंपनी ने तीन प्लेन का इस्तेमाल बुधवार को बंद किया। दिसंबर में जेट के पास 124 प्लेन थे। इस साल जनवरी तक वह देश की दूसरी बड़ी एयरलाइन थी और आज देश में कंपनी सिर्फ 15 प्लेन से कामकाज कर रही है। वह भारत की सबसे छोटी एयरलाइन बन गई है।

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