देश में हर साल 25 जनवरी को मनाया जाता है राष्ट्रीय मतदाता दिवस

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फरीदाबाद, 25 जनवरी। देश में हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य लोगों को मतदान और वोटर के रूप में उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है। यह विचार अतिरिक्त उपायुक्त सतबीर मान ने लघु सचिवालय के सभागार मे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश स्तर पर मुख्य सचिव, हरियाणा विजय वर्धन के मार्गदर्शन में आज आयोजित मतदाता दिवस के अवसर पर उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि मतदाता को जो अधिकार प्राप्त होते हैं, कुछ लोगों को इनकी जानकारी नहीं होती है। इसलिए बतौर मतदाता उन्हे अपने अधिकारों की जानकारी होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस है। देश में हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को मतदान और वोटर के रूप में उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है, ताकि वे अच्छे से अपने जनप्रतिनिधि का चुनाव कर सके। कार्यक्रम के दौरान जिला स्तर पर मतदाता जागरूकता प्रतियोगिताओ मे सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया और मतदाताओं के लिये निर्धारित शपथ भी उपस्थित लोगों को दिलवाई गई। उल्लेखनीय है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश स्तर पर आयोजित मतदाता दिवस पर उच्च अधिकारियों ने लोगो को इस बारे विभिन्न रूपो मे जागरुक करते हुए कहा कि देश में राष्ट्रीय मतदाता दिवस बनाने की शुरुआत वर्ष 2011 हुई थी। इसके बाद हर साल 25 जनवरी को इसे मनाया जाता है। मतदाता दिवस पर सरकारों और विभिन्न संगठनों की ओर से इसके प्रचार-प्रसार हेतु जागरूकता कार्यक्रम किए जाते हैं।
मतदान का अधिकार:-
देश में 18 वर्ष के बाद वोटर के रूप में रजिस्टर्ड हर व्यक्ति को वोट देने का अधिकार है। किसी भी मतदाता को धर्म, जाति, वर्ण, संप्रदाय या लिंग के आधार पर मतदान से वंचित नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही वह वोटर को अपने क्षेत्र के निर्धारित कैंडिडेट्स के बारे में जानकारी प्राप्त करने व चुनावी मैदान में उतरने वाले कैंडिडेट्स के सम्बंध में पूरी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। मतदाताओं को ये अधिकार दिया गया है। वह प्रत्याशी के एसेट, आपराधिक रिकॉर्ड, शैक्षणिक योग्यता की जानकारी ले सकता है। किसी प्रत्याशी की शैक्षणिक योग्यता जानना मतदाता का अधिकार है। निवास स्थान बदलने पर नई जगह मतदान का अधिकार मतदाता को उसी स्थान पर मतदान करना होता है। जिस इलाके की मतदाता सूची में उसका नाम होता है, रहने की जगह बदलने पर वह नए इलाके में वोटर के रूप में रजिस्टर हो सकता है और वोटर कार्ड बनवा सकता है। लेकिन पहले वाली जगह से वोटर लिस्ट से नाम हटवाना होता है। इसके बाद वह नए स्थान पर मतदान कर सकता है। पसंद नहीं होने पर किसी को भी वोट नहीं देने का विकल्प (नोटा) मतदाताओं को कोई प्रत्याशी पसंद नहीं आने पर अपनी नापसंद जाहिर करने का भी विकल्प दिया गया है। मतदाता नोटा के जरिए प्रत्याशियों में किसी को भी नहीं चुनने के अधिकार का प्रयोग कर सकता है। जिसमे नोटा का रिकॉर्ड भी रखा जाता है। डाक मतपत्र से मतदान देश का चुनाव आयोग ऐसे लोगों को डाक मतपत्र के जरिए वोट डालने की सुविधा उपलब्ध कराता है। जो पोलिंग बूथ तक नहीं पहुंच सकते हों, इनमें चुनाव में लगे कर्माचरी, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कार्मिक आदि शामिल होता है। मतदान का अधिकार
देश में 18 वर्ष के बाद वोटर के रूप में रजिस्टर्ड हर व्यक्ति को वोट देने का अधिकार है। किसी भी मतदाता को धर्म, जाति, वर्ण, संप्रदाय या लिंग के आधार पर मतदान से वंचित नहीं किया जा सकता है।
मतदाता दिवस की शुरुआत कब से?
25 जनवरी 2011 से राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शुरुआत की गई। 26 जनवरी 1950 को चुनाव आयोग ने काम करना शुरू किया था। राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शुरुआत का मकसद ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं का सूची में नाम जोड़ना, मतदान के लिए प्रेरित करना है। मतदाता दिवस पर क्या होता है? राष्ट्रीय मतदाता दिवस मतदाताओं को समर्पित है। इस दिन मतदाताओं के बीच जागरूकता फैलाई जाती है। नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस अवसर पर नए मतदाताओं को वोटर कार्ड देकर सम्मानित भी किया जाता है।

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