मोदी सरकार : बड़े आर्थिक सुधारों को दी जाएगी तवज्जो

0
335

 

नई दिल्ली : नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार ने प्रचंड बहुमत से केंद्र की सत्ता में वापसी की है। अपने पहले कार्यकाल में इस सरकार ने आर्थिक सुधारों पर पूरा जोर दिया है। चाहे ईज ऑफ डूइंग बिजनस हो या जीएसटी, मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए हर संभव प्रयास किया है। अब अपनी दूसरी पारी में भी सरकार ने अर्थव्यवस्था की रफ्तार को तेजी देने के लिए कई अहम सुधारों को लागू करने की तैयारी कर ली है, जिन्हें शुरुआती 100 दिनों के भीतर अंजाम दिया जा सकता है।

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने कहा है कि नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती निजी निवेश में तेजी लाना और बेहतर क्रेडिट फ्लो को सुनिश्चित करना होगा। गुरुवार को इकनॉमिक टाइम्स शांतनु नंदन शर्मा को दिए गए एक साक्षात्कार में कांत ने आर्थिक सुधारों पर खुलकर बातचीत की और बताया कि आने वाले दिनों में कौन-कौन से सुधारों को अंजाम दिया जाएगा। आइए इनपर एक नजर डालते हैं।

मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में अर्थव्यवस्था के लिए क्या-क्या कदम उठाएगी?
मेरे विचार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न क्षेत्रों में संरचनात्मक सुधारों के जरिये उच्च विकास दर पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जिससे निजी क्षेत्र द्वारा निवेश में बढ़ोतरी होगी और रोजगारों का सृजन होगा। इससे क्रेडिट फ्लो में भी उल्लेखनीय तेजी आएगी। वह मुख्य रूप से लोगों के जीवन स्तर में सुधार पर ध्यान देंगे, जिसके तहत एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट पर विशेष जोर दिया जाएगा।

पिछले पांच वर्षों में पीएम नरेंद्र मोदी बेहद साहसिक आर्थिक सुधारक बनकर उभरे हैं। उन्होंने कई तरह के संरचनात्मक सुधारों की शुरुआत की है, जिनमें वस्तु एवं सेवा कर (GST), दिवाला एवं दिवालिया संहिता, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और रियल एस्टेट (रेग्युलेशन ऐंड डेवलपमेंट) ऐक्ट शामिल हैं। जब आप इस तरह के वृहद सुधारों को अंजाम देते हैं तो इसके नतीजे मिलने में दो-तीन सालों का वक्त लग जाता है।

अभी सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बरकरार रखने की है। हमें उद्योग एवं निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, जो आगे चलकर व्यापक रूप से रोजगारों के सृजन में मदद करेगा। मुझे लगता है कि पीएम पर्यटन, कंस्ट्रक्शन और टेक्सटाइल्स क्षेत्र पर ध्यान देंगे, जो भारी तादाद में रोजगारों का सृजन करते हैं।

कृषि के क्षेत्र में किए गए मुख्य सुधारों का मकसद किसानों की आय को दोगुना करना होगा। कृषि में मार्केट नॉन फंक्शनल है। इसके लिए कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग, रिस्ट्रक्चरिंग इशेंशियल कमोडिटिज और एपीएमसी एक्ट्स, टेक्नॉलजी इनफ्लो, ई-नाम, टेक्नॉलजी का प्रवाह, बाजार तक पहुंच, कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग की जरूरत है। पीएम एग्री-बिजनस पर काफी ध्यान दे सकते हैं। सरकार उत्खनन, रेलवे, भारतनेट और तेल एवं गैस क्षेत्र में सुधारों को भी बढ़ावा दे सकती है। इन सबसे आने वाले दिनों में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

इसका फैसला प्रधानमंत्री को लेना है। मंत्रालय 100 दिनों के एक्शन प्लान पर पहले ही काम कर चुके हैं। नीति आयोग भी इसपर काम कर चुका है। लेकिन अंतिम फैसला प्रधानमंत्री को लेना है। 100 दिनों का प्लान मुश्किल और बड़े सुधारों को बढ़ावा देने के लिए है।

प्रधानमंत्री का स्पष्ट विचार है कि सरकार को कोई कारोबार करने के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। कारोबार करना निजी क्षेत्र का काम है। यह अकेले ही अर्थव्यवस्था की उत्पादकता की दक्षता बढ़ाने के लिए काफी है। नुकसान झेलने वाले और गैर-रणनीतिक सरकारी संस्थानों के निजीकरण की जरूरत है। इस बारे में नीति आयोग ने सरकार को सिफारिशों की एक लंबी सूची सौंपी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here