लेंडर्स ने आरकॉम के गिरवी शेयर बेचे

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मुंबई : इंडसइंड बैंक और एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज के गिरवी पड़े शेयरों को बेचने के बाद रिलायंस कम्युनिकेशंस में अनिल अंबानी की हिस्सेदारी 37.57 पर्सेंट से घटकर 21.97 पर्सेंट रह गई है। स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी के मुताबिक, इंडसइंड बैंक ने सोमवार को आरकॉम के 4.52 पर्सेंट शेयर बेचे थे।

एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज ने अनिल अंबानी की कंपनी की तरफ से गिरवी रखे गए 11.08 पर्सेंट शेयरों को बुधवार को बेचा। अंबानी और उनके मालिकाना हक वाली निजी कंपनियों के पास दिसंबर 2018 तक टेलीकॉम कंपनी के 53.08 पर्सेंट शेयर थे। हालांकि, उसके बाद से आरकॉम में उनकी हिस्सेदारी घटकर 37.57 पर्सेंट रह गई थी, जो अब लेंडर्स के गिरवी शेयर बेचने के बाद घटकर 21.97 पर्सेंट हो गई है।

टेलीकॉम कंपनी के शेयर प्राइस में इस साल 1 जनवरी के बाद से 70 पर्सेंट की गिरावट आई है। 1 फरवरी को आरकॉम ने कहा था कि वह दिवालिया होने की अर्जी देगी क्योंकि पिछले एक साल में वह कर्ज चुकाने के लिए अपनी संपत्तियों को नहीं बेच पाई है। कंपनी पर करीब 42 हजार करोड़ का कर्ज है।

अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने पिछले महीने कहा था कि एलएंडटी फाइनेंस और इडलवाइज के पास उसने जो शेयर गिरवी रखे थे, उन्हें भुनाए जाने के बाद से ग्रुप की कंपनियों की मार्केट वैल्यू में काफी गिरावट आई है। रिलायंस ग्रुप ने इडलवाइज ग्रुप को अपने गिरवी शेयरों को बेचने से रोकने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया था। 31 दिसंबर 2018 तक एलआईसी के पास आरकॉम के 5.93 पर्सेंट शेयर थे। सीएलएसए ग्लोबल मार्केट के पास भी कंपनी में 1.53 पर्सेंट हिस्सेदारी थी।

आरकॉम की परेशानी मई 2018 में तब शुरू हुई, जब नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) ने उसके खिलाफ बैंकरप्सी की तीन याचिकाओं को स्वीकार किया था। ये आवेदन स्वीडन की टेलीकॉम इक्विपमेंट कंपनी एरिक्सन ने दायर किए थे। वह आरकॉम से 1,500 करोड़ रुपये के बकाये की मांग कर रही थी।

एरिक्सन बाद में 550 करोड़ रुपये पर आरकॉम के साथ समझौते के लिए मान गई थी, लेकिन इसकी समयसीमा भी आरकॉम ने मिस कर दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आखिर में कहा कि अगर आरकॉम 20 मार्च तक एरिक्सन का बकाया नहीं चुकाती तो उसके चेयरमैन अनिल अंबानी को तीन महीने के लिए जेल भेज दिया जाएगा। 19 मार्च को आरकॉम ने एरिक्सन का ब्याज समेत 580 करोड़ रुपये चुका दिया था।

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