मनमाने एमआरपी पर कस सकता है कानूनी शिकंजा

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नई दिल्ली:  केंद्र सरकार ने घरेलू ऑफलाइन ट्रेडर्स से दो टूक कहा है कि वह ऑनलाइन रीटेलर्स की पूंजीगत और तकनीकी बढ़त को किसी भी रूप में बाधित नहीं करना चाहती, अलबत्ता छोटे व्यापारियों को भी मेनस्ट्रीम में लाना चाहती है। लेकिन बड़ी कंपनियों को नियमों से खेलने की छूट नहीं होगी और एमआरपी या डिस्काउंट में भेदभाव रोकने के और उपायों पर भी विचार होगा।

ड्राफ्ट ई-कॉमर्स पॉलिसी और आंतरिक व्यापार के मसले पर मंगलवार को स्टेकहोल्डर्स ]के साथ एक मीटिंग के दौरान नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने व्यापार संगठनों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके हितों की निगरानी करेगी। लेकिन साथ ही कहा कि रीटेल सेक्टर की ग्रोथ और कन्ज्यूमर्स के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘किसी सेगमेंट को बढ़ावा देना या रोकना सरकार का काम नहीं है। हम ऐसे सुझावों को नहीं मान सकते कि फलां सेग्मेंट में पूंजी, तकनीक या सहूलियतें नियंत्रित की जाएं। नियमों के दायरे में हम सब कुछ मार्केट पर छोड़ देना चाहते हैं, जो अच्छा करेगा वो बढ़ेगा। हमारा लक्ष्य रीटेल सेक्टर को 10-12 पर्सेंट की दर से बढ़ाना है, अगर ऐसा हुआ तो छोटे व्यापारी भी अपने आप बढ़ेंगे’।

कपड़ा, मोबाइल और कन्ज्यूमर गुड्स डीलर्स की ओर से शिकायत की गई कि आज एमआरपी का कोई मतलब नहीं रह गया है। कुछ कंपनियां एक ही सामान को अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए अलग एमआरपी दे रही हैं तो कुछ एमआरपी काफी ऊंचा रखती हैं। अमिताभ कांत ने कहा कि अगर ऐसा है तो सरकार इसकी विसंगतियां दूर करने के लिए रेग्युलेटरी उपायों पर विचार करेगी।

कपड़ा व्यापारियों के प्रतिनिधि सुरेश बिंदल ने कहा, ‘एक ही एमआरपी पर ऑनलाइन और ऑफलाइन ट्रेडिंग से भी फर्क पड़ा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी डिस्काउंट के साथ सीधे कन्ज्यूमर को सप्लाइ करता है, जबकि ऑफलाइन में इसे डिस्ट्रीब्यूटर, होलसेलर, रीटेलर से गुजरना होता है। हर स्टेप का मार्जिन तय है।’

कैट के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने पॉलिसी से घरेलू ई-टेलर्स को बाहर रखने का विरोध किया और कहा कि आगे चलकर ये भी विदेशी ई-टेलर्स की राह चलने लगेंगे। सीईओ ने कहा कि नियमों के उल्लंघन पर ट्रेडर्स के हितों की रक्षा जरूर करेगी, लेकिन फिलहाल सरकार की कोशिश छोटे व्यापारियों को ऑर्गनाइज्ड सेग्मेंट से जोड़ने की है। इसके लिए सबसे जरूरी साधन डिजिटाइजेशन है, जो आपको हर हाल में अपनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ट्रेडर्स के हितों की रक्षा के लिए ही आंतरिक व्यापार विभाग बना है, ऐसे में चिंतित होने की जरूरत नहीं है। उन्हें भी रीटेल सेक्टर का दायरा बढ़ाने में सहयोग देना चाहिए।

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