प्राधिकरण द्वारा अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में कानूनी जागरूकता शिविर आयोजित

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हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश एंव चेयरमेन अशोक कुमार वर्मा व माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एंव सचिव पीयूष शर्मा के मार्गदर्शन में ए डी आर सेंटर के सभागार में सफाई कर्मियों व पैराविधिक स्वयं सेवकों के लिए विशेष कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन जगत सिंह रावत पैनल अधिवक्ता सदस्य स्पेशल टास्क फोर्स जिला पलवल द्वारा किया गया।शिविर में पैनल अधिवक्ता जगत सिंह रावत ने सफाई कर्मियों व पैराविधिक स्वयं सेवकों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के मुख्य प्रावधानों व विशेषताओं के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि इसके नियम नगर निगम क्षेत्रों से बाहर भी लागू होंगे। इन नियमों में अब शहरी संबंधी समूहों, जनगणना वाले कस्बों, अधिसूचित औद्योगिक टाउनशिप, भारतीय रेल के नियंत्रण वाले क्षेत्रों, हवाई अड्डों, बंदरगाह, रक्षा प्रतिष्ठानों, विशेष आर्थिक क्षेत्र, केंद्र एवं राज्य सरकारों के संगठनों, तीर्थ स्थलों, और धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के स्थानों को भी शामिल किया गया है। ठोस कचरा प्रबंधन का उद्देश्य, ठोस कचरे को नियंत्रित करने, इकट्ठा करने, प्रोसेस करने, और निपटाने के लिए, एक किफायती और सुसंगत तरीके से सार्वजनिक स्वास्थ्य संरक्षण व जहरीले और खतरनाक रसायनों और सामग्री की मात्रा को कम करने के लिए अपशिष्ट रिसाइकलिंग कार्यक्रमों को नियमित रूप से बनाए रखने के लिए कचरे से सामग्री का पुनः उपयोग और पुनर्प्राप्त करना है। हमारे देश में प्रति वर्ष लाखों टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें प्लास्टिक कचरा, जैव चिकित्सा अपशिष्ट, खतरनाक अपशिष्ट तथा ई-कचरा शामिल है। सबसे पहले हमें तरल व जैविक कचरा, ठोस व सूखा कचरा, बायो मैडिकल कचरा की पहचान होनी आवश्यक है। उक्त कचरा में घरेलू कचरा, खतरनाक कचरा जैसे टायर, बिजली के उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और बड़े औद्योगिक कंटेनरों के खतरनाक सामान भी सार्वजनिक स्थानों पर फैंकने से बहुत ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। कोई भी व्यक्ति स्वयं उत्पन्न ठोस कचरे को अपने परिसर के बाहर सड़कों, खुले सार्वजनिक स्थलों पर, या नाली में, या जलीय क्षेत्रों में न तो फेंकेगा, या जलाएगा अथवा न ही दफनाएगा। कचरा की पहचान के साथ ही कचरा प्रबंधन के बारे में जागरुकता होना बहुत आवश्यक है। हमें हरे रंग के कूड़ेदान में जैविक कचरा, नीले रंग के कूड़ेदान में सूखा कचरा, लाल रंग के कूड़ेदान में बायोमैडिकल कचरा डालना चाहिए। सफाई कर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करते हुए बताया कि न्यायालय परिषर में प्लास्टिक की पानी की बोतल, कागज, चिप्स, बिस्कुट, पैकिंग के रैपर तथा ई-कचरा को अलग अलग कूड़ेदान में ही डालें और पक्षकारों को भी कूडेदानों का प्रयोग करने के लिए जागरूक किया जाए। कचरा प्रबंधन हमारी सभी की नैतिक जिम्मेदारी है, जिससे जल प्रदूषण, भूमि प्रदूषण व पर्यावरण प्रदूषण को कम किया जा सके। इसके अलावा उन्होंने प्लास्टिक व पोलीथीन के प्रयोग ना करने, ना जलाने, सूखा कचरा ना जलाने, घर के सामने व नालियों में कचरा ना फैलाने, कूडेदानों के उचित प्रयोग करने, प्रशासन के जल शक्ति अभियान, स्वच्छ भारत मिशन व डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में सहयोग करने तथा जल संरक्षण सहित, ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण करने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने प्राधिकरण की सेवाओं सहित हेल्पलाइन नंबर 01275 298003 के बारे में भी जानकारी प्रदान की । शिविर में पैराविधिक स्वयं सेवक इंद्रजीत ने पैराविधिक स्वयं सेवकों द्वारा जरूरतमंद लोगों के लिए दी जाने वाली सेवाओं के बारे में जानकारी प्रदान की। प्रेस विज्ञप्ति सेवा में प्रेषित है ।धन्यवाद भवदीय जगत सिंह रावत पैनल अधिवक्ता /सदस्य स्पेशल टास्क फोर्स जिला पलवल।

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