किसान क्रेडिट कार्ड पर जल्द मिलेगा ब्याज-मुक्त लोन

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नई दिल्ली: सरकार खेती में उत्पादन को बेहतर करने के लिए 25 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रहा है।  संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपना भाषण में इस बात पर प्रकाश डाला। बता दें कि बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में वादा किया गया था कि आने वाले सालों में सरकार की कोशिश 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की है। पार्टी के एक दूसरे वादे की बात करें तो किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज-मुक्त लोन देने की बात कही गई थी। उम्मीद है कि 5 जुलाई को आम बजट में इस पर मुहर लग सकती है।

कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न स्कीमों को पूरा करने के लिए बड़ा खर्च होना है और अंतर-मंत्रालयी कमिटी ने डबल फार्मर्स इनकम (DFI) का प्रस्ताव दिया है जिसने खेती और इससे जुड़े दूसरे सेक्टरों में सुधार के लिए 13 चुनिंदा ऐक्शन पॉइंट्स सुझाए हैं।

इन 13 पॉइंट्स में पोस्ट प्रॉडक्शन ऑपरेशंस जैसे संग्रह करना, ट्रांसपोर्टेशन और वेयरहाउस के लिए अग्रीकल्चर लॉजिस्टिक सिस्टम शामिल हैं। इसके अलावा किसानों की मदद के लिए अग्री मार्केट इंटेलिजेंट सिस्टम ताकि मांग के हिसाब से फैसला ले सकें, ग्रामीण इलाकों में किसान-केंद्रित मार्केटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे ऐक्शन पॉइंट्स भी शामिल हैं।

हालांकि, ये पॉइंट्स लॉन्ग और मीडियम टर्म लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं। इस बीच मंत्रालय ने 100 दिन के प्लान के तहत एक समयसीमा तय करते हुए अभी जारी प्रोग्राम में तेजी लाने के लिए प्रयास किए हैं।

31 जुलाई तक राज्यों से पीएम किसान योजना के लिए संभावित लाभार्थियों की वेरिफाइड लिस्ट शेयर करने को कहा है। मंत्रालय ने पिछले हफ्ते राज्यों से अगले 100 दिनों के अंदर किसान क्रेडिट कार्ड्स (KCCs) के तहत कम से कम 1 करोड़ किसानों को लाने के लिए गांव या बैंक स्तर पर मुहिम चलाने को कहा था।

अधिकारी ने कहा, ‘इस कदम से सरकार को एक चुनिंदा अविधा या रीपेमेंट की शर्त पर किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ब्याज मुक्त लोन देने में मदद मिलेगी।’ उन्होंने संकेत दिए नई सरकार द्वारा आने वाले बजट में 5 जुलाई को इस योजना को शुरू करने का ऐलान किया जा सकता है।

गौर करने वाली बात है कि बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि 1 लाख रुपये तक के नए कृषि लोन पर 0 प्रतिशत ब्याज लगेगा और प्रिंसिपल अमाउंट को चुकाने की शर्त 1 से 5 साल के बीच होगी।

अधिकारी ने कहा, ‘इस तरह की स्कीमों की कवरेज बढ़ाने के लिए KCC को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। अभी इसकी पहुंच 6.95 करोड़ किसानों तक ही सीमित है जबकि देश में 14.5 करोड किसानों के पास खेतीयोग्य जमीन है।’

किसान क्रेडिट स्कीम को 1998 में लॉन्च किया गया था ताकि किसान बीज, खाद, पेस्टिसाइड्स और खेती के लिए जरूरी दूसरी चीजों की खरीद के लिए बैंक से उधार ले सकें।

पिछले हफ्ते इस स्कीम पर एक रिव्यू मीटिंग में पता चला कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और दक्षिणी राज्यों की तुलना में किसान क्रेडिट कार्ड्स की पहुंच गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व राज्यों में बहुत कम है।

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