भारत के आयात और निर्यात में बड़ी गिरावट

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नई दिल्ली: भारत में आयात जून में बीते 4 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह बीते साल के मुकाबले 9 फीसदी की गिरावट के साथ यह 40.29 अरब डॉलर पर रहा। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी के लिए यह मुश्किल स्थिति है और इसका साफ संकेत है कि खपत में कमी आ रही है और मार्केट में मंदी है। यही नहीं निर्यात में भी 10 फीसदी के करीब कमी आई है। जनवरी-मार्च तिमाही में भारत की इकनॉमिक ग्रोथ 5.8 फीसदी रही, जो बीते 5 सालों में सबसे कम थी। इकॉनमिस्ट के मुताबिक निजी सेक्टर के कमजोर निवेश और उपभोग में कमी यानी मांग घटने के चलते यह स्थिति पैदा हुई है।

अब इम्पोर्ट में कमी के आंकड़े से एक बार फिर से यह डर बढ़ा है कि अप्रैल-जून तिमाही में संकट गहरा सकता है और ग्रोथ जनवरी-मार्च तिमाही से भी नीचे जा सकती है। बीती दो तिमाहियों में भारतीय अर्थव्यवस्था में ऑटोमोबाइल्स, पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स और कन्ज्यूमर गुड्स की सेल में बड़ी गिरावट आई है। भारत का तेल आयात जून में 13.33 फीसदी घटा है, इसकी वजह शायद कच्चे तेल की गिरती कीमत है। हालांकि सोने के आयात में 13 पर्सेंट का इजाफा देखने को मिला है।डेटा के मुताबिक गोल्ड और तेल से इतर अन्य तमाम प्रॉडक्ट्स का आयात भी 9 फीसदी तक कम हुआ है। ऐल ऐंड टी फाइनैंशल होल्डिंग्स में चीफ इकॉनमिस्ट रूपा रेगे के मुताबिक इम्पोर्ट में कमी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है। यह गंभीर स्लोडाउन की स्थिति है। आयात के अलावा भारत के निर्यात में भी कमी आई है और जून महीने में पहली बार बीते महीनों के मुकाबले गिरावट देखने को मिली है। बीते साल के मुकाबले निर्यात में 9.71 फीसदी गिरावट हुई है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि चीन और अमेरिका में ट्रेड वॉर और कई अन्य देशों की ओर से संरक्षणवादी नीतियां अपनाए जाने की वजह से निर्यात में गिरावट दर्ज हुई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस के प्रेजिडेंट शरद कुमार सर्राफ के मुताबिक, ‘निर्यात में यह गिरावट वैश्विक स्तर पर कमजोर मांग और टैरिफ वॉर के बढ़ने की वजह से दर्ज की गई है। अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के अलावा ईरान के घटनाक्रम ने वर्ल्ड इकॉनमी की समस्याओं में इजाफा किया है।’

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