भारत की सबसे बड़ी कॉफी चेन है कैफे कॉफी डे

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नई दिल्ली: बेवरेज कंपनी कोका-कोला भारत की सबसे बड़ी कॉफी चेन कैफे कॉफी डे (सीसीडी) में एक बड़ा हिस्सा खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। मामले की जानकारी रखने वाले दो अधिकारियों ने बताया कि कोका-कोला तेजी से बढ़ते कैफे सेगमेंट में पांव जमाना चाहती है। वह कार्बोनेटेड ड्रिंक्स के अपने मुख्य कारोबार से जुड़ा जोखिम भी इसके जरिए घटाना चाहती है।शुरुआती दौर में है बातचीत
उन्होंने बताया कि बातचीत शुरुआती दौर में है। एक अधिकारी ने बताया, ‘इस संभावित खरीदारी का मामला अटलांटा में कोका-कोला के हेडक्वॉर्टर से देखा जा रहा है। कंपनी की ग्लोबल टीम के अधिकारी सीसीडी के मैनेजमेंट से बातचीत कर रहे हैं। इससे कोका-कोला को एयरेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स के मुकाबले तेजी से बढ़ते कैफे बिजनस में काफी बढ़त मिल जाएगी।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि बातचीत अभी शुरुआती दौर में है। डील होने के बारे में अभी पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है।’

सीसीडी को वी जी सिद्धार्थ ने शुरू किया था। इस पर कॉफी डे ग्लोबल का मालिकाना हक है, जो कॉफी डे एंटरप्राइजेज की सब्सिडियरी है। इसके पास 1,750 कैफे हैं। सीसीडी ऑर्गनाइज्ड कैफे सेगमेंट की मार्केट लीडर है। इसका सीधा मुकाबला टाटा ग्रुप की स्टारबक्स के अलावा अपेक्षाकृत छोटी कैफे चेंस बरिस्ता और कोस्टा कॉफी से है। स्टारबक्स के भारत में 146 स्टोर हैं। हालांकि, पिछले दो साल में सीसीडी के विस्तार की रफ्तार घटी है। कर्ज तो बढ़ा ही है, चायोस और चाय पॉइंट सरीखी टी कैफे से भी चुनौती मिल रही है। सीसीडी ने वित्त वर्ष 2018 में 90 स्मॉल फॉरमेट स्टोर बंद किए थे।

सीसीडी ने मार्च 2019 में खत्म हुई तिमाही में 76.9 करोड़ रुपये की स्टैंडअलोन नेट सेल्स दर्ज की थी। इसमें साल दर साल आधार पर 43.64% बढ़ोतरी हुई थी। मार्च तिमाही में सीसीडी को 22.28 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ था। उससे सालभर पहले की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 16.52 करोड़ रुपये का था। पिछली तीन तिमाहियों से यह सेम स्टोर सेल्स में 10-11 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज कर रही है।

ऑनलाइन प्रॉडक्ट रिव्यू प्लैटफॉर्म टैगटेस्ट के को-फाउंडर जसपाल सभरवाल ने कहा, ‘सीसीडी ने भारत में 1990 के दशक में कैफे कल्चर शुरू किया था। उसने अपनी अच्छी पहचान बनाई है। हालांकि इस चेन को इनोवेशन और बदलाव की सख्त जरूरत है। हाल के वर्षों में कैफे इंडस्ट्री में कई इनोवेशन हुए हैं, लेकिन बड़े ब्रैंड्स का इसमें कुछ खास योगदान नहीं रहा है। कोका-कोला इस मामले में अच्छी भूमिका निभा सकती है।’

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