सरकार ने दी RBI को सफाई 3.6 लाख करोड़ का फंड मांगने पर

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नई दिल्ली : सरकार ने उन रिपोर्ट्स को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें यह कहा जा रहा था कि सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से 3.6 लाख करोड़ के फंड की मांग की है।

वित्तीय मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि वित्तीय स्थिति पूरी तरह सामान्य है और रिजर्व बैंक के सामने ऐसी कोई मांग नहीं रखी गई है। लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि यह इस बात की चर्चा पर जोर दिया जाएगा कि रेग्युलेटर को अधिषेश (सरप्लस) के तौर पर कितनी धनराशि की आवश्यकता है।

वित्तीय मामलों के सचिव गर्ग ने कहा, ‘मीडिया में कई तरह की गलत अटकलें लगाई जा रही हैं। सरकार का राजकोषीय गणित पूरी तरह से सही है और सरकार द्वारा आरबीआई को 3.6 या 1 लाख करोड़ रुपए के फंड ट्रांसफर करने के लिए कहने जैसा कोई भी प्रस्ताव नहीं है।’

गर्ग ने यह भी कहा कि सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच सिर्फ आरबीआई के इकॉनमिक कैपिटल फ्रेमवर्क को तय करने से संबंधित बातचीत ही चल रही है। बता दें कि आरबीआई के प्रतिरोध के बावजूद, सरकार चाहती है कि केंद्रीय बैंकों की पूंजी आवश्यकता पर निर्णय लेने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया जाए जो सरकार को लाभांश प्रवाह पर स्पष्टता दे। 19 नवंबर को होने वाली केंद्रीय बैंकों की बैठक में लाभांश आदि की नीति और नियमों पर चर्चा की जा सकती है।

गौरतलब है कि जून 2018 के अंत तक आरबीआई के आकस्मिक निधि में 2.32 लाख करोड़ रुपये थे जबकि मुद्रा और स्वर्ण पुनर्मूल्यांकन खाते में 5.3 लाख करोड़ रुपये थे। आरबीआई ने आकस्मिक निधि के लिए 14,190 करोड़ रुपये अलग करने के बाद सरकार को लाभांश में 50,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया। सरकार का मानना है कि प्रावधान आवश्यकता से कहीं अधिक हैं।

गर्ग ने कहा, ‘सरकार का बजट पूरी तरह नियंत्रण में है। हम वित्त वर्ष 2018-19 के अंत में राजकोषीय घाटे को 3.3 प्रतिशत तक सीमित कर देंगे।

दरअसल, सरकार ने बाजार से 70 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना को भी छोड़ दिया है। सितंबर के अंत में सरकार का राजकोषीय घाटा वित्तीय वर्ष 2019 के लिए 95.3% तक पहुंच गया जो जीडीपी के 3.3 प्रतिशत के टारगेट के उल्लंघन को लेकर चिंता का विषय है। वित्त वर्ष 2018 में सितंबर के अंत तक राजकोषीय घाटा बजट के 91.3 प्रतिशत पर रहा था, लेकिन सरकार ने जीडीपी के 3.2 प्रतिशत के लक्ष्य को खो दिया था जो सालाना जीडीपी का 3.5% था।

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