शेयर और बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेश हुआ कम

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मुंबई :  वित्त मंत्रालय ने इस हफ्ते बड़े विदेशी बैंकों की मीटिंग बुलाई है, जो फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) के लिए कस्टोडियन का काम करते हैं।

विदेशी फंड मैनेजरों ने इस साल अप्रैल के बाद से एक लाख करोड़ के शेयर और बॉन्ड बेचे हैं। कच्चे तेल के दाम में तेजी आने और रुपये में गिरावट के चलते उन्होंने भारत से पैसा निकाला है। फाइनैंशल मार्केट में चर्चा है कि अंतरराष्ट्रीय वजहों और मैक्रो-इकॉनमी संबंधी दिक्कतों के अलावा कॉर्पोरेट बॉन्ड में एफपीआई इन्वेस्टमेंट पर रिजर्व बैंक के पाबंदी लगाने से बॉन्ड मार्केट में बिकवाली तेज हुई है।

एक सीनियर बैंकर ने बताया कि कॉर्पोरेट बॉन्ड में एफपीआई इन्वेस्टमेंट पर आरबीआई जो लिमिट तय की है, उसे निवेशक और इंटरमीडियरीज सरकार और सेबी के सामने जोरशोर से उठाएंगे। इस रूल में कहा गया है कि एफपीआई किसी कंपनी का समूचा बॉन्ड इश्यू नहीं खरीद सकता। इस वजह से अगले साल मार्च तक हर विदेशी फंड को अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करना होगा। उन्हें पक्का करना होगा कि एक कॉर्पोरेट के बॉन्ड में उनका 20 पर्सेंट से अधिक निवेश न हो। शॉर्ट टर्म यानी एक साल से कम अवधि के बॉन्ड के लिए यह सीमा 10 पर्सेंट है।

इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया, ‘मीटिंग में बॉन्ड पर एफपीआई रूल्स की समीक्षा की मांग उठेगी। सेबी भी जल्द ही कस्टोडियन बैंकों के साथ बातचीत करेगा। वह एनआरआई इन्वेस्टमेंट, एफडीआई रूल्स से जुड़ी उलझनों और एफपीआई होल्डिंग रूल्स पर उनकी राय लेगा। इसका मकसद नियमों को आसान बनाना और एफपीआई निवेश बढ़ाने के उपाय करना है। कोई भी सरकार शेयर बाजार को पसंद नहीं करती, जिसे अक्सर उसके प्रदर्शन का पैमाना माना जाता है। खासतौर पर चुनावी साल में मार्केट करेक्शन तो उन्हें बिल्कुल गवारा नहीं होता।’ कस्टोडियन बैंकों में एचएसबीसी, सिटी, जेपी मॉर्गन, स्टैनचार्ट और दूसरे बैंक शामिल हैं।

सेबी के साथ मीटिंग में कस्टोडियन एफपीआई में एनआरआई निवेश की सीमा की समीक्षा की मांग कर सकते हैं। नियम के मुताबिक, एक एफपीआई में एक एनआरआई 25 पर्सेंट से अधिक होल्डिंग नहीं रख सकता, जबकि एनआरआई ग्रुप के लिए यह लिमिट 49 पर्सेंट है। कुछ विदेशी फंड मैनेजर एफपीआई और एफडीआई होल्डिंग के नियमों पर तस्वीर साफ करने की मांग कर रहे हैं। विदेशी फंड के एक सलाहकार ने बताया, ‘मिसाल के तौर पर, जब एक कंपनी में निवेश 10 पर्सेंट से बढ़कर 15 पर्सेंट हो जाता है तो समूचे स्टेक को (5 पर्सेंट के बजाय) एफडीआई माना जाता है।’

 

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