वित्तीय संकट से जूझ रही एयरलाइंस कंपनी जेट एयरवेज को इमर्जेंसी फंडिंग

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मुंबई : वित्तीय संकट से जूझ रही एयरलाइंस कंपनी जेट एयरवेज को इमर्जेंसी फंडिंग तभी मिलेगी, जब उसके प्रवर्तक (प्रमोटर) कंपनी में 750 करोड़ रुपये की पूंजी डालेंगे। कंपनी के कर्जदाताओं ने अपने कर्ज के हिस्से को एयरलाइंस की 49 फीसदी हिस्सेदारी में बदलने को लेकर एक प्लान को मंजूरी दी है। एसबीआई तथा पीएनबी इमर्जेंसी फंड के रूप में कंपनी में 500 करोड़ रुपये की रकम डालेंगे। लेकिन दोनों बैंक यह पूंजी तभी डालेंगे, जब अन्य कर्जदाता इस बात से सहमति जताएंगे कि कंपनी से पैसे वसूलने का पहला अधिकार इन्हीं दोनों बैंकों का होगा। सूत्रों के मुताबिक, कर्जदाता जेट एयरवेज में मेजॉरिटी हिस्सेदारी नहीं चाहते हैं। इसलिए उन्होंने डेट कन्वर्जन की सहमति जताई है और एयलाइन में 49 फीसदी की हिस्सेदारी लेंगे।

एसबीआई और पीएनबी को छोड़कर अन्य कर्जदाता इस प्लान के तहत कंपनी में 1,000 करोड़ की रकम डालेंगे। लेकिन यह तभी होगा, जब कंपनी के प्रवर्तक नरेश गोयल और एतिहाद एयरलाइंस कंपनी में 750 करोड़ रुपये डालेंगे। जब सभी पक्ष राजी हो जाएंगे, तो एसबीआई और पीएनबी कंपनी में 500 करोड़ रुपये का इमर्जेंसी फंड डालेंगे।

जेट एयरवेज को चालू रखने तथा खड़े हो चुके विमानों को दोबारा परिचालन में शामिल करने के लिए इमर्जेंसी फाइनैंसिंग जरूरी है। कंपनी के 119 विमानों में से केवल 70 विमान ही उड़ान भर रहे हैं और पट्टा कंपनियां हर दूसरे दिन कार्रवाई कर रहे हैं। सितंबर 2018 में एयरलाइन के बेड़े में 124 हवाईजहाज थे, जिनमें से 16 कंपनी के अपने विमान थे।

एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि जेट एयरवेज के कर्जदाताओं के साथ रिजॉल्यूशन प्लान पर चर्चा चल रही है। इसमें कई बातें होंगी, जिनमें कर्जदाताओं के कर्जों को इक्विटी में बदलना भी शामिल है।

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