जमीनी हकीकत से दूर है दिल्ली की टैक्स रेवेन्यू ग्रोथ

0
355

 

नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा में शनिवार को पेश 2017-18 के आर्थिक सर्वे और मौजूदा वित्त वर्ष के अनुमानित आंकड़ों के आधार पर राज्य सरकार ने इकॉनमी में जान फूंकने का दावा किया है। पिछले वित्त वर्ष में 14.7% ज्यादा टैक्स कलेक्शन के साथ ही चालू वित्त वर्ष में करीब 17% तक रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई गई है, लेकिन रिपोर्ट में कई तरह की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया गया है। कुल टैक्स रेवेन्यू में 38.1% हिस्सेदारी रखने वाले गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) कलेक्शन में दिल्ली की हालत लचर है और इस मद में 14% ग्रोथ के लिए इसे केंद्र सरकार से करीब 6,000 करोड़ का मुआवजे की दरकार होगी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा, ‘केंद्र ने नोटबंदी और सीलिंग करके तेज रफ्तार से चलती अर्थव्यवस्था पर ब्रेक लगा दिए, लेकिन हमने नोटबंदी के बावजूद दिल्ली की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाया।’ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने टैक्स कलेक्शन में ग्रोथ का श्रेय सरकार की ईमानदारी को देते हुए कहा कि हमारी सरकार व्यापार और दूसरी जगहों से कमाने की कोशिश नहीं करती और वही पैसा टैक्स के रूप में लौट रहा है। हालांकि दिल्ली के आर्थिक जानकारों और शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि कर के सबसे बड़े स्रोत व्यापार और उद्योगों के स्तर पर हालात ठीक नहीं हैं और जीएसटी कलेक्शन पिछले साल से भी कम हो रहा है। ऐसे में इस मद में सरकार 14 पर्सेंट ग्रोथ के लिए पूरी तरह केंद्रीय मुआवजे पर निर्भर है, जो कानूनन मिलना तय है।

आर्थिक सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में दिल्ली सरकार को 35 हजार करोड़ रुपये टैक्स रेवेन्यू मिला, जो उससे पिछले साल के मुकाबले 14.7% ज्यादा है। लेकिन इसमें 4 महीने का वैट और बाकी महीनों का जीएसटी कलेक्शन 26 हजार करोड़ रहा, जिसमें केंद्रीय मुआवजा भी शामिल है। मौजूदा वित्त वर्ष में जनवरी तक दिल्ली सरकार को जीएसटी के मद में सिर्फ 15,800 करोड़ मिले थे, 14 पर्सेंट ग्रोथ के लिए करीब 5 हजार करोड़ मुआवजे की जरूरत थी।

पेट्रोल, डीजल की महंगाई के चलते वैट और सीएसटी के मद में 4,855 करोड़ मिले, जबकि एक्साइज, स्टांप और दूसरे नॉन-जीएसटी मदों में अच्छी ग्रोथ देखी जा रही है। मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार का कुल टैक्स रेवेन्यू टारगेट 42 हजार करोड़ रुपये है। ऐसे में केंद्रीय जीएसटी मुआवजे के साथ अगर यह टारगेट पूरा होता है तो उसमें दूसरे करों में दर्ज की जा रही 15 से 25% तक ग्रोथ का भी बड़ा योगदान होगा। इस साल शराब की बिक्री से स्टेट एक्साइज में रेकॉर्ड वृद्धि हुई है क्योंकि दो साल इस मोर्चे पर रक्षात्मक रुख के बाद अब सरकार ने रेवेन्यू पर फोकस किया है और कई नई दुकानें भी खोली हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here