चंदा कोचर की किस्मत पति के कबूलनामे ने तय कर दी थी

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मुंबई : आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर का भविष्य तभी तय हो गया था, जब पिछले साल अप्रैल में उनके पति दीपक कोचर ने स्वीकार किया था कि कई वर्षों से विडियोकॉन ग्रुप के साथ उनकी डीलिंग्स चल रही थीं। इसके बाद चंदा कोचर ने इस मामले के खुलासे तक का जो भी घटनाक्रम बताया, उस पर यकीन करना बैंक के बोर्ड के लिए कठिन हो गया था।

मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों से बातचीत से पता चला कि दीपक के कबूलनामे और इस मामले में पारदर्शिता नहीं होने के बारे में सफाई देने की चंदा की कोशिशों के बाद बैंक के बोर्ड का उन पर से भरोसा उठ गया था। दीपक ने अप्रैल 2018 में बैंक के बोर्ड को लेटर लिखकर विडियोकॉन ग्रुप से उनके संबंध की बात स्वीकार की थी। उनके और विडियोकॉन ग्रुप के संबंधों और हितों के टकराव के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स आने के बाद यह खुलासा किया गया था।

दीपक के लेटर लिखने से पहले सेबी ने आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड से कहा था कि वह दीपक से एक औपचारिक पत्र लिखने को कहे, जिसमें वेणुगोपाल धूत के विडियोकॉन ग्रुप से अपनी डीलिंग्स की वह जानकारी दें। चंदा कोचर के दावों से उलट जानकारी वाले इस पत्र के चलते बोर्ड ने चंदा से सवाल-जवाब किए और पिछले वर्षों में बैंक की आचार संहिता के तहत किए गए उनके डिसक्लोजर्स पर दोबारा नजर भी डाली।

कोचर ने इस स्टोरी के बारे में उनके कमेंट के लिए भेजे गए एसएमएस, ईमेल और वॉट्सऐप मेसेज का जवाब नहीं दिया। आईसीआईसीआई बैंक ने भी जवाब नहीं दिया। बोर्ड के अधिकारी इस बात से नाराज थे कि चंदा कोचर 2016 के घटनाक्रम के बाद भी यह कहती रहीं कि उनके पति और विडियोकॉन ग्रुप के बीच कोई बिजनेस डीलिंग्स नहीं थी। साल 2016 इस मायने में अहम है कि उसी साल चंदा से जुड़े हितों के टकराव के बारे में पहली मीडिया रिपोर्ट सामने आई थी। चंदा ने आईसीआईसीआई की एक आंतरिक जांच में जवाब दिया था कि कोई बिजनेस डीलिंग नहीं थी।

तब चेयरमैन एम के शर्मा की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने बैंक की आचार संहिता के तहत दिए गए चंदा के बयान को सही मान लिया था कि इन प्रावधानों के तहत खुलासा करने लायक कुछ भी नहीं है। बैंक की आचार संहिता के प्रावधानों के अनुसार, बैंक के कस्टमर्स या वेंडर्स के साथ अपने परिवार के किसी भी सदस्य के कारोबारी संबंध की जानकारी कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से देनी होती है।

हो सकता है कि पहले के वर्षों में कोड ऑफ कंडक्ट के तहत किए गए डिक्लरेशन में सही जानकारी न होने के कारण अलग बात कही गई हो, लेकिन 2016 में आरोप लगने के बाद भी चंदा ने खुलासे लायक कोई चीज न होने की बात कही तो बोर्ड में कुछ लोगों को लगा कि ‘असल बात हो सकता है कि जानबूझकर छिपाई गई हो।’

एक शख्स ने कहा, ‘इस पर विश्वास करना कठिन है कि 2017 और 2018 में भी उन्होंने अपनी फाइलिंग्स में इन डीलिंग्स के बारे में कुछ नहीं कहा।’ उन्होंने कहा, ‘पहली बार आरोप लगने के बाद चंदा अपने पति से पूछ सकती थीं। उसके बाद भी डीलिंग्स की जानकारी न देना प्रोफेशनल बर्ताव नहीं कहा जाएगा।’

करीब एक दशक तक आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ रहीं चंदा कोचर के खिलाफ कर्ज मंजूर करने में कथित भ्रष्टाचार के संबंध जांच चल रही है। इस जांच के घेरे में दीपक कोचर भी हैं। आरोप है कि ये कर्ज चंदा ने अपने पति के कारोबार को मिली मदद के बदले मंजूर किए थे।

बोर्ड के सदस्य चंदा की दलीलों और बिजनेस डीलिंग्स की जानकारी नहीं होने के बारे में उनकी ओर से गिनाई गई वजहों से हैरान रह गए थे। चंदा ने ही अपने पति का पत्र सीलबंद लिफाफे में बोर्ड को दिया था, जिसमें दीपक ने विडियोकॉन ग्रुप से अपनी डीलिंग्स की बात स्वीकार की थी। इस बारे में बोर्ड के पूछने पर चंदा ने कहा था कि उनका काम अलग है और उससे उनके पति की बिजनेस डीलिंग्स का कोई संबंध नहीं है और दोनों लोग अपने कामकाज की कोई जानकारी एक-दूसरे को नहीं देते हैं।

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