अटके पड़े हाइवे प्रॉजेक्ट्स को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने किया नई नीति का ऐलान

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नई दिल्ली :केंद्र सरकार ने करीब 30 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले अटके पड़े हाइवे प्रॉजेक्ट्स को पूरा करने के लिए नई नीति का ऐलान किया है। इनमें वैसे प्रॉजेक्ट्स भी शामिल हैं जिनकी ठेकेदार कंपनियां बैंकरप्ट्सी ट्राइब्यूनल में दीवालियेपन का मुकदमा झेल रही हैं। सरकार ने यह कदम बैंकों और प्राइवेट कंपनियों की फंडिंग खोलने के लिए उठाया। फंडिंग की कमी के कारण इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी आईएलऐंडएफएस के भी 28 से 30 प्रॉजेक्ट्स अटके पड़े हैं।

9 मार्च को जारी सड़क परिवहन मंत्रालय के एक सर्कुलर के मुताबिक, नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) जैसी एजेंसियां अब एक सप्लीमेंट्री अग्रीमेंट के जरिए किसी कंपनी के साथ किए कॉन्ट्रैक्ट को वक्त से पहले खत्म कर सकती हैं। इसमें कहा गया है कि अथॉरिटी प्राइवेट कंपनियों को उनके किए काम की कीमत या बकाया कर्ज का 90% में जो भी कम होगा, देकर फाइनल सेटलमेंट कर लेगी।

ऐसे होगी डील
एक अधिकारी ने बताया, ‘पूरा हो चुके काम की कीमत का निर्धारण प्रगति का विस्तृत आकलन कर किया जाएगा। वहीं, कॉन्ट्रैक्ट अग्रीमेंट के मुताबिक बकाए कर्ज का निर्धारण होगा, जिसमें प्रॉजेक्ट की वास्तविक कीमत का उल्लेख होता है।’ अब तक सभी अटके पड़े प्रॉजेक्ट्स पर बनाओ, संचालित करो और हस्तांतरित करो (बिल्ड, ऑपरेट ऐंड ट्रांसफर यानी BOTToII) मोड लागू था।

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