फिर छिड़ी चीन में बने उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम

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नई दिल्ली: कश्मीर मसले पर चीन के अड़ियल रवैये और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तानी हितों की वकालत ने एक बार फिर देश में चाइनीज उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम को हवा दे दी है। ट्रेड एसोसिएशंस ने 1 सितंबर से चाइनीज सामान नहीं बेचने की पेशकश की है, वहीं स्वदेशी संगठनों ने चिंता जताई है कि चीन की टेलिकम्युनिकेशन कंपनियां भारत की संवेदनशील परियोजनाओं में आसानी से टेंडर जीत रही हैं, जो आगे चलकर देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने चाइनीज उत्पादों के देशव्यापी बहिष्कार पर फैसले के लिए 29 अगस्त को सभी राज्यों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है, जिसमें 1 सितंबर से किसी भी बाजार में कोई चाइनीज सामान नहीं बेचने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
कन्फेडरेशन के प्रेसिडेंट बीसी भरतिया और जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि 2018-19 में भारत ने चीन से 70 अरब डॉलर का आयात किया है, जबकि उसे सिर्फ 17 अरब डॉलर का निर्यात हुआ है। यह व्यापार घाटा दर्शाता है कि भारत चीन के लिए एक विशाल बाजार है। इसके बावजूद उसका लगातार शत्रुतापूर्ण बर्ताव हमारे लिए खतरे की घंटी है। हमें आर्थिक मोर्चे पर चीन को सबक सिखाना होगा और व्यापारियों ने इसी क्रम में यह पहल की है। उन्होंने सरकार से चीनी उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने और उन देशों से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट खत्म करने की मांग की, जिनसे होकर सस्ता और दोयम दर्जे का चाइनीज माल आ रहा है।

स्वदेशी जागरण मंच की ओर से देश में चाइनीज टेलि-कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से उत्पन्न चुनौतियों पर आयोजित एक बैठक में विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि चीन सरकार की मदद से वहां की कंपनियां भारत के क्रिटिकल प्रोजेक्ट्स में न्यूनतम बोली के दम पर आसानी से टेंडर जीत रही हैं। यह आगे चलकर सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। मंच के सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने कहा कि भारत के टेलिकॉम्युनिकेशन नेटवर्क में चीनी उपकरणों के भी अपने खतरे हैं, जिन पर सरकार को चेतने की जरूरत है। सूचना और संचार के क्षेत्र में सिविल और सैन्य दूरियां सिमट जाती हैं, ऐसे में गैर-सैन्य परियोजनाओं में भी चीनी कंपनियों और उपकरणों की भागीदारी एक गंभीर रणनीतिक खतरा हो सकता है।

सोशल मीडिया में भी चीन को आर्थिक मोर्चे पर सबक सिखाने की मांगें उठ रही हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि बहिष्कार का दायरा सिर्फ फेस्टिव सामान, गिफ्ट और खिलौने तक सीमित रहा तो इससे वैल्यू टर्म्स में इम्पोर्ट पर 2-3% ही असर होगा। चाइनीज इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल उत्पादों और मशीनरी के बहिष्कार के लिए भी मुहिम चलानी होगी, लेकिन इसके पहले देसी कंपनियों को सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाना होगा।

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