चीन और वेटिकन के साथ हुए समझौते के बाद आपसी सहमति से पहले बिशप की नियुक्ति

0
294

 

पेइचिंग:  चीन और वेटिकन के बीच मेल-मिलाप को बढ़ावा देने के लिए हुए करार के बाद पहली बार पोप और पेइचिंग की संयुक्त मंजूरी के बाद चीन में बिशप की नियुक्ति की गई है। चीन में करीब 1.20 करोड़ कैथलिक ईसाई हैं जो दशकों से सरकार संचालित असोसिएशन और वेटिकन समर्थक गैर मान्यता प्राप्त भूमिगत चर्च के बीच बंटे हुए हैं। असोसिएशन का पादरी कम्युनिस्ट पार्टी चुनती है।

पिछले साल सितंबर में हुए समझौते के तहत कैथलिक बिशप की नियुक्ति चीन और वेटिकन की सहमति से हुई है। चीन के आधिकारिक चर्च चाइनीज कैथलिक पैट्रियॉटिक असोसिएशन ने बताया कि सोमवार को याओ शुन को आंतरिक मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र के उलानकाब का बिशप नियुक्त किया गया। चीन के कानून के मुताबिक फादर और बिशप को अपना पंजीकरण करना होता है और देश के आधिकारिक चर्च के साथ काम करना पड़ता है। वेटिकन के धर्मपीठ (होली सी) प्रेस ऑफिस के मेतियो ब्रूनी की ओर से जारी बयान के मुताबिक एंतोनियो याओ शुन की नियुक्ति को पोप से भी मंजूरी मिली है। यह वेटिकन और चीन के बीच हुए अस्थायी करार के अंतर्गत पहली नियुक्ति है।चीन बिशप की कमी का सामना कर रहा है

पोप फ्रांसिस ने चीन की ओर से नियुक्त 7 पादरियों को मान्यता इस भय के बावजूद दी है कि चीन इसका इस्तेमाल आधिकारिक चर्च से असंबद्ध श्रद्धालुओं की पहचान कर कार्रवाई में कर सकता है। चीन में कैथलिक ईसाईयों की संख्या में वृद्धि के साथ वेटिकन ने पेइचिंग से संबंध बहाल करने की पहल तेज कर दी है, लेकिन दोनों में तनाव बरकरार है। वेटिकन एकमात्र यूरोपीय देश है जिसके ताइवान से राजनयिक सबंध हैं जबकि चीन मानता है कि ताइवान उसका अलग हुए प्रांत है और उसके साथ एकीकरण होना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here