एग्रीकल्चर के लिए नई ट्रेड पॉलिसी में एग्री एक्सपोर्ट को साल 2022 तक दोगुना बढ़ाकर 60 अरब डॉलर करने का रखा गया लक्ष्य

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नई दिल्ली: एग्रीकल्चर के लिए नई ट्रेड पॉलिसी में भारत से एग्री एक्सपोर्ट को साल 2022 तक दोगुना बढ़ाकर 60 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे एग्रो ट्रेड और इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। इस कारोबार से जुड़ी कंपनियों और निर्यातकों ने यह बात कही है। उनका कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, क्लस्टर्स पर ध्यान देने और राज्य सरकारों की भागीदारी बढ़ने से इनवेस्टमेंट के नए मौके बनने के साथ किसानों को फसल की अच्छी कीमत मिलने का रास्ता तैयार होगा।

पिछले गुरुवार को केंद्रीय कैबिनेट ने ‘एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट पॉलिसी, 2018’ को मंजूरी दी, जिसमें ऑर्गेनिक और प्रोसेस्ड प्रॉडक्ट्स के निर्यात पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। हालांकि, सरकार सेंसिटिव कमोडिटी की कीमतों और सप्लाई पर नजर रखेगी और केस टु केस बेसिस पर समय-समय पर उनकी समीक्षा करेगी।

अभी तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में मौके देखकर देश से एग्रीकल्चरल गुड्स का एक्सपोर्ट होता रहा है। इसे पॉलिसी लेवल पर कोई सपोर्ट नहीं मिला है। एक्सपोर्टर्स का कहना है कि जाहिर तौर पर इससे किसानों को नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि नए पॉलिसी उपायों से वे एग्री और एग्री बेस्ड प्रॉडक्ट्स के निर्यात के बारे में बेहतर अनुमान लगा पाएंगे।

महिंद्रा एग्री सॉल्यूशंस के एमडी और सीईओ अशोक शर्मा ने बताया, ‘यह एक्सपोर्ट पर पाबंदी हटाकर किसानों की आमदनी डबल करने की दिशा में अहम कदम है। इसमें मार्केट एक्सेस के लिए इंस्टीट्यूशनल स्ट्रक्चर की बात कही गई है। क्वॉलिटी को लेकर दावे सुलझाने का इंतजाम भी इस पॉलिसी में किया गया है।’

एग्री कंपनियों और एक्सपोर्टर्स का कहना है कि एक्सपोर्ट पॉलिसी का देश की एग्रीकल्चरल पॉलिसी से तालमेल दिखना चाहिए। सरकार के कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी करने से इनकी कीमत भारत में अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में अधिक हो गई है। एक एक्सपोर्टर ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर यह बात कही। एग्रीकल्चर प्रॉडक्ट्स के ग्लोबल एक्सपोर्ट में भारत का मार्केट शेयर 2016 में 2.2 पर्सेंट था। ऐसे देशों में भारत अभी नौवें नंबर पर है। माना जा रहा है कि नई पॉलिसी से एग्रीकल्चर वैल्यू चेन में प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ेगा।

शर्मा की कंपनी देश के बड़े अंगूर निर्यातकों में से एक है। उन्होंने कहा कि सरकार एक्सपोर्ट को ध्यान में रखकर रूरल क्लस्टर्स डिवेलप करना चाहती है, जो अच्छी पहल है। अंगूर के अलावा महिंद्रा एग्री सॉल्यूशंस अब अनार और पूर्वोत्तर से अदरक का निर्यात करने की संभावना तलाश रही है। उन्होंने बताया, ‘चीन, कनाडा और दक्षिण पूर्वी एशियाई देश के ज्यादा एग्री प्रोड्यूस खरीदने से पिछले एक साल में निर्यात में 12 से 15 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है।’ हालांकि, शर्मा ने यह भी कहा कि इस पॉलिसी के आधार पर अभी एक्सपोर्ट ग्रोथ का अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन यह पॉलिसी अच्छी है। इससे एक्सपोर्ट बढ़ाने में आगे चलकर काफी मदद मिलेगी।

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