हेल्दी रखना है तो अपने सोने का टाइम करें फिक्स

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कम नींद लेना विशेष रूप से आपके दिल के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। नींद की कमी से ग्रस्‍त लोगों में स्‍ट्रेस हॉर्मोन बढ़ जाता है। यह सीआरपी नामक कार्डियोवस्क्युलर बीमारी का एक प्रमुख कारण है। रात 10 बजे से सुबह 3 बजे के बीच का समय वह समय होता है जब शरीर की अधिकतम कार्य प्रणाली की मरम्मत होती है।

जब आप इस सुनहरे वक्‍त के दौरान नींद नहीं लेते तब ऑक्सिडेटिव यानी उपचय क्षति होती है जिससे इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ जाता है। ऐसे में कार्सिनोजेनेसिस यानी कैंसरकारी ब्रेन स्ट्रोक और दिल के दौरे की संभावना बढ़ जाती है। अमेरिकन हार्ट असोसिएशन के एक हालिया बयान के मुताबिक, अनियमित नींद की दिनचर्या, मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोरोनरी सहित कई कार्डियोवस्क्युलर जोखिमों से जुड़ी है।

ज्यादा सोना भी सेहत के लिए हानिकारक
वैसे तो निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन अत्यधिक लंबी नींद की अवधि और हृदय स्वास्थ्य के बीच एक संबंध प्रतीत होता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से रात में 9 या अधिक घंटे तक सोते हैं उनके दिल की धमनी की भित्तियों में अधिक कैल्शियम बनता है और नियमित तौर पर 7 घंटे सोने वालों की तुलना में उनकी पैर की धमनियां अधिक कठोर हो जाती हैं। लंबे समय तक दिन में सोना या फिर रात में अधिक समय तक सोने की समस्या एक विकार से संबंधित है जिसे हाइपर्सोमनिया कहा जाता है। स्लीप एप्निया, जो अक्सर मोटापे से संबंधित होता है, उच्च रक्तचाप, दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है। बार-बार नींद आना भी एक खतरनाक बीमारी है
केवल थके हुए महसूस करने की बजाय हाइपरसोमनिया से ग्रस्‍त लोग पूरे दिन या तो बार-बार नींद की आगोश में जाते रहेंगे या फिर अनुचित समय जैसे काम के दौरान या फिर बातचीत के दौरान भी नींद में रहेंगे। इाइपरसोमनिया से ग्रस्‍त लोग सोने के बाद भी तरोताजा महसूस नहीं करते और अक्सर परेशान महसूस करते हैं। इसके लक्षणों में चिंता, बेचैनी, भूख की कमी और स्मृति समस्याओं के साथ ही सामाजिक व्‍यवहार में अक्षमता भी शामिल है।

खराब नींद की वजह अनियमित दिनचर्या के कारण भी
जो लोग बहुत ज्यादा या बहुत कम नींद लेते हैं, उनकी मृत्यु दर भी अधिक होती है। लगभग हर किसी को थोड़ी देर तक सोने में परेशानी हो सकती है। लेकिन यदि खराब नींद की समस्‍या लगातार हो रही है और यह दिनचर्या बनती जा रही है, तो अपनी अनियमित दिनचर्या की जांच करें। हो सकता आप कुछ ऐसी गलतियां कर रहे हों जिस वजह से आपकी नींद गायब हो गई हो। उदाहरण के लिए, मोबाइल या लैपटॉप पर बहुत देर तक काम करना या बिस्तर पर जाने के बाद देर तक मोबाइल देखते रहना या फिर सोने से पहले चाय या कॉफी पी लेना आदि।

नींद की कमी की एक वजह मोटापा भी है
दिल की बीमारी और नींद की कमी को जोड़ने के लिए एक अन्य क्रियाविधि में मोटापा भी शामिल है। इस बात के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं कि अपर्याप्त नींद वजन बढ़ाने से भी जुड़ी है। एक सिद्धांत यह है कि कम नींद लेने वाले सामान्‍यत अधिक नाश्ता लेते हैं और अधिक आहार का भी सेवन करते हैं। इसके अलावा, अपर्याप्त नींद विभिन्न मस्तिष्क प्रणालियों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसमें ऊर्जा ग्रहण करना, निर्णय लेना और भोजन के पसंद को नियंत्रित करने वाली तंत्रिकाएं शामिल हैं। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि नींद की समस्‍या से ग्रस्‍त लोग कम सब्जी खाते हैं और मीठे, वसायुक्‍त खाद्य पदार्थों की ओर उनका झुकाव अधिक रहता है। अनिद्रा की वजह से हाई बीपी की भी हो सकती है समस्या
हाई बीपी, कार्डियोवस्क्युलर बीमारी के लिए एक अन्य प्रमुख जोखिम कारक है। कभी-कभी अनिद्रा को इसके लिए जोखिम कारक के रूप में भी देखा जा सकता है। अनिद्रा यानी मुश्किल से नींद आना या बिना सोये रहना, किसी न किसी बिंदु पर लोगों के एक तिहाई जीवन को प्रभावित करती है। इसके अलावा अनिद्रा से ग्रस्‍त कुछ लोग अतिसंवेदनशील स्थिति में रहते हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक अवस्था है और अनिद्रा के शिकार लोग चिंता और चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं। यह रक्तचाप की समस्याओं को भी बढ़ा सकता है।

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