सरकारी ऑडिट’ जारी रखने को मंजूरी

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मुंबई : कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की एक पैनल रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को देश में मल्टीनैशनल ऑडिट फर्म्स को काम करने की अनुमति देना जारी रखना चाहिए। बता दें कि अगर ऐसा होता है तो बिग-4 के नाम से मशहूर इंटनैशनल नेटवर्क्स- डेलॉइट, पीडब्ल्यूसी, ईवाई और केपीएमजी के लिए राहत की बात होगी। हमारे सहयोगी इकॉनमिक टाइम्स के मुताबिक, 200 पेज की एक रिपोर्ट में एक्सपर्ट की कमिटी ने कहा कि एक मल्टीनैशनल नेटवर्क का हिस्सा होने और ग्लोबल कॉस्ट को साझा करने का यह मतलब नहीं है कि इन फर्म्स को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा नियंत्रित किया गया है या उनके स्वामित्व में रखा गया है।

इंडियन फर्म्स द्वारा सरकार को दी गई शिकायतों का पालन करते हुए यह बात सामने आई कि विदेशी लोग सीधे तौर पर मानदंडों का उल्लंघन कर रहे थे और अनुचित लाभ प्राप्त कर रहे थे।

 

आपको बता दें कि मल्टीनैशनल ऑडिटिंग फर्म्स (MAFs) और इंडियन ऑडिटिंग फर्म्स (IAFs) के बीच की यह लड़ाई 2 साल पहले तेज हुई जब 1 अप्रैल 2017 को कंपनी ऐक्ट 2013 द्वारा ऑडिट रोटेशन को अनिवार्य कर दिया गया। इसके बाद मल्टीनैशनल प्रतिस्पर्धियों के पास अपने क्लाइंट्स को खोने वाले कई आईएएफ सामने आए। ऑडिट के लिए फॉरेन फर्म्स को अनुमति नहीं है, लेकिन MAF नेटवर्क फर्म्स के जरिए काम करते हैं और अपने मल्टीनैशनल ब्रैंड का नाम उपयोग नहीं करते हैं।

हालांकि पैनल ने सिफारिश की है कि इंटनैशनल नेटवर्क के साथ ब्रैंडिंग की अनुमति दी जानी चाहिए और सुझाव दिया कि प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए संबंधित कानूनों और चार्टर्ड अकाउंटेंट नियमों में उचित परिवर्तन किए जाने चाहिए। पैनल में यह भी कहा गया है कि वे इंडियन ऑडिट फर्म्स जो भारतीय कानूनों के तहत पार्टनरशिप या लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप (LLPs) के रूप में स्थापित इंटनैशनल नेटवर्क के सदस्य हैं, तब तक नियमों का उल्लंघन नहीं करते हैं जब तक कि सभी इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के सदस्य हैं।

गौरतलब है कि इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएल एंड एफएस) और धोखाधड़ी के आरोप में घिरे नीरव मोदी जैसे लोगों के विवाद सामने आने से मल्टीनैशनल ऑडिट फर्म्स जांच के दायरे में आ गए। डेलॉइट की नेटवर्क फर्म इन दोनों के लिए ऑडिटर्स थे जबकि ईवाई की नेटवर्क फर्म आईएल ऐंड एफएस की वर्तमान ऑडिटर है। दिवालियापन की कई परिस्थितियों में भी इन बिग-4 के नेटवर्क फर्म ऑडिटर के रुप में पाए गए थे। कई डोमेस्टिक फर्म चाहते थे कि विदेशी लोगों को भारत से प्रतिबंधित किया जाए।

 

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