मोदी की दुनियाभर के तेल कंपनियों के साथ बैठक

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नई दिल्ली :प्रधानमंत्री मोदी ने कल तेल पर महाबैठक की। इंडिया एनर्जी फोरम में दुनिया और भारत की बड़ी तेल और गैस कंपनियों के सीईओज को संबोधित किया। पीएम की तेल क्षेत्र के दिग्गजों के साथ यह तीसरी सालाना बैठक हुई है। इसमें सउदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री खालिद ए अल-फलिह और संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री उपस्थित थे। इसके अलावा प्रमुख तेल कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारी और विशेषज्ञ भी बैठक में शामिल हुए।

.पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम की चिंता
दरअसल, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों एवं विभिन्न वैश्विक मुद्राओं में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरावट की वजह से रुपये लगातार टूट रहा है। सरकार के पास पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को थामने के कुछ खास विकल्प बचे नहीं हैं। एनडीए सरकार ने इसी महीने डीजल-पेट्रोल के दाम में प्रति लीटर 2.50 रुपये की कटौती का ऐलान किया था। उसकी अपील पर बीजेपी शासित राज्यों ने भी 2.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयास 10 दिनों में ही धूमिल हो गए और अब दोनों कटौतियों के बराबर दाम बढ़ चुके हैं।

डॉलर में नहीं, रुपये में पेमेंट की पेशकश
प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम उत्पादक देशों से कच्चे तेल के आयात की भुगतान शर्तों की समीक्षा पर जोर दिया ताकि आयातक देशों की स्थानीय मुद्रा को कुछ राहत मिल सके। उन्होंने सऊदी अरब से लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत दुनियाभर की तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक में उनसे तेल की कीमत डॉलर की जगह रुपये में चुकाने की पेशकश की। उन्होंने तेल उत्पादक देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि कच्चे तेल के ऊंचे दाम से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।

80% आयात पर निर्भर है भारत
भारत कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्राहक है। ईरान पर 4 नवंबर से लागू होनेवाले अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत तेल आयात के लिए सऊदी अरब की तरफ देख रहा है। गौरतलब है कि भारत तेल की कुल जरूरतों का 80% हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इराक और सऊदी अरब के बाद ईरान उसका तीसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है।

सीईओज से सवाल
मोदी सरकार ने 2015 में न्यू एक्सप्लोरेशन ऐंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (NELP) की जगह हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन ऐंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP) लाई थी। इसके जरिए सरकार ने तेल कंपनियों को सेस के भुगतान से मुक्ति दे दी थी। साथ ही, उन्हें विदेशी तेल कंपनियों को अपनी 100% हिस्सेदारी बेचने की अनुमति भी मिल गई थी। लेकिन, इन प्रयासों के कुछ खास नतीजे नहीं दिखे। इसलिए प्रधानमंत्री ने तेल कंपनियों के सीईओज से पूछा कि पिछली बैठक में उन्होंने जो सुझाव दिए थे, सरकार की तरफ से उन पर अमल किए जाने के बावजूद तेल एवं गैस की खोज और उत्पादन क्षेत्र में नया निवेश क्यों नहीं आ रहा है।

भारत के सामने बड़ी चुनौतीः प्रधान
बातचीत के दौरान बैठक में शामिल विशेषज्ञों ने खासकर ऊर्जा क्षेत्र में कारोबार सुगमता के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की। वहीं, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बैठक में कहा, ‘कच्चे तेल के बढ़ते दाम से भारत के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी हो रही है। पिछले एक साल में कच्चे तेल के दाम डॉलर के लिहाज से 50 प्रतिशत और रुपये के लिहाज से 70 प्रतिशत बढ़ चुके हैं।’

तेल उत्पादक देश की मनमानी पर सवाल
बैठक के बाद जारी आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार मोदी ने गौर किया कि कच्चे तेल का बाजार उत्पादक देशों के हिसाब से चल रहा है। तेल उत्पादक देश ही उत्पादन की मात्रा और दाम तय कर रहे हैं। पीएमओ के बायान में मोदी के हवाले से कहा गया है, ‘हालांकि, बाजार में उत्पादन पर्याप्त मात्रा में हो रहा है, लेकिन तेल क्षेत्र में मार्केटिंग के विशेष तौर तरीकों से तेल के दाम चढ़ गए हैं। प्रधानमंत्री ने दूसरे बाजारों की तरह कच्चे तेल के बाजार में उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच मजबूत भागीदारी स्थापित किए जाने पर जोर दिया। इससे नरमी से उबर रही वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता आएगी।’

सहयोग को आगे आएं तेल उत्पादक देशः मोदी
प्रधानमंत्री ने बातचीत में भारत के लिहाज से कुछ खास नीतिगत मुद्दों की तरफ विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल के उपभोक्ता देशों को कच्चे तेल के ऊंचे दाम की वजह से कई तरह की आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके सामने संसाधनों की गंभीर तंगी खड़ी हो रही है। वक्तव्य में कहा गया है, ‘इस फासले को भरने के लिए तेल उत्पादक देशों का सहयोग काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि तेल उत्पादक देशों को अपने पास उपलब्ध निवेश योग्य बचतों को विकासशील देशों में तेल क्षेत्र में वाणिज्यिक लाभ के लिए लगाना चाहिए।

 

चालू खाता घाटे की चिंता
पिछले दो माह से कच्चे तेल के ऊंचे दाम से भारी दबाव झेल रहा है। इससे घरेलू सतर पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा तो बढ़ ही गया है, साथ ही चालू खाते का घाटा बढ़ने का जोखिम भी बढ़ रहा है। अगस्त मध्य से विश्व बाजार में कच्चे तेल के लगातार बढ़त दाम की वजह से पिछले दिनों पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क कटौती का असर भी समाप्त होता रहा है।

विकसित देशों का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने देश में तेल, गैस खोज के क्षेत्र में अधिक क्षेत्रों में चल रहे कार्य की तरफ भी ध्यान आकृष्ट किया और इनमें टेक्नॉलजी और विस्तार के क्षेत्र में विकसित देशों से सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने गैस क्षेत्र में वितरण नेटवर्क में निजी भागीदारी का भी जिक्र किया।

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