मलेरिया, डेंगू पिछले वर्ष की तुलना मे काफी कम : डॉ ब्रहम्दीप

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पलवल। सिविल सर्जन डा. ब्रह्मदीप ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में मलेरिया के मरीज इस वर्ष में काफी कम है। अत इस वर्ष स्थिति नियंत्रण में है। मलेरिया प्रभावित क्षेत्रो के 54 गांवो मे पहले राउंड एवं दूसरे राउंड का स्प्रे का कार्य पूरा किया जा चुका है। डेंगू के 6 मरीजों की पुष्टि हुई है, जिसमें से 5 मरीज पलवल शहर से है और एक मरीज फुलवारी गांव से है जबकि पिछले वर्ष डेंगू के 45 केस थे। इस वर्ष सभी मरीजो का इलाज किया जा चुका है और सभी प्रकार की आवश्यक कार्यवाही जैसे फोगिंग, सोर्स रिडक्शन इत्यादी जैसी एक्टिविटीज स्वास्थ्य विभाग द्वारा करवा दी गई है। सभी मरीज अब स्वस्थ है। मलेरिया व डेंगू के खात्मे को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से गंभीर एवं प्रयासरत है, जिसमें उन्होंने बताया कि कोविड-19 जैसी जानलेवा बीमारी के साथ-साथ मलेरिया, डेंगू व चिकिनगुनिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग पैनी नजर बनाए हुए है। इसी कड़ी में उन्होंने बताया कि मच्छर ठहरे (एकत्रित) हुए पानी मे अंडे देते है, जिससे मलेरिया व डेंगू की बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की बढ़ोतरी तेजी से होती है। इसलिए तुरंत प्रभाव से मलेरिया उन्मूलन की सभी टीम ठहरे हुए पानी मे काला तेल व टेमिफोस की दवाई का छिडक़ाव कर रहे है, जिससे मच्छर का लार्वा खत्म हो सके और जानलेवा बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की उत्पत्ति पर पूर्ण रूप से रोक लग सके। ब्रीडिंग चेकर, फील्ड वर्कर द्वारा घर-घर जाकर मलेरिया उन्मूलन सम्बन्धी मच्छर के लार्वा की ब्रीडिंग चेक की जा रही है और ब्रीडिंग पाए जाने पर तुरंत प्रभाव से टीमो द्वारा टेमिफोस की दवाई डलवाकर लार्वा को नष्ट किया जा रहा है। इसी कड़ी मे उन्होंने बताया कि मलेरिया के शुरूआती लक्षणों मे तेज ठण्ड के साथ बुखार आना, सिर दर्द होना व उल्टीयो का आना है। इसलिए कोई भी बुखार आने पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र मे जाकर मलेरिया की जांच करवाए और अगर मलेरिया जांच मे पाया जाता है तो उसका 14 दिन का इलाज स्वास्थ्यकर्मी की देखरेख मे करें। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मी स्लाइड व आरडीटी भी बना रहे है। अब तक जिले मे अक्टूबर माह तक 1 लाख 3 हजार 879 आरडीटी व स्लाइड बना ली गई है, जिनमे पलवल में 32 मलेरिया के मरीज सामने आए है और सभी मरीजो का लगभग इलाज पूर्ण हो चुका है।
मलेरिया के मुख्य लक्षण
सर्दी व कपकपी के साथ तेज बुखार का होना, सिरदर्द होना व गंभीर मामलो मे उल्टियां होना।
मलेरिया का उपचार व बचाव
कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है इसलिए बुखार होने पर अपने नजदीक स्वास्थ्य केन्द्र में तुरंत खून की जांच कराएं। मलेरिया होने पर तुरन्त 14 दिन का पूर्ण आमूल उपचार स्वास्थ्यकर्मी की देखरेख मे लें, क्योकि आमूल उपचार न लेने से मलेरिया बुखार बार-बार होता है। मलेरिया बुखार बार-बार होने से खून की कमी हो जाती है जोकि बहुत घातक होती है। घरो में मच्छरनाशक दवाई का छिडक़ाव करवाए। मच्छरदानी का प्रयोग करें। पूरी बाजू के कपडें पहने। घर के आस-पास पानी इकटठा न होने दे। बरसात का मौसम शुरु होने से पहले घर के आस-पास के गड्ढïों को भर दिया जाए। बरसात का पानी इकटठा न होने पाए, जिसमे मच्छर पनपते है।
इस वर्ष पलवल मे मलेरिया व डेंगू का पूरी तरह से खात्मा करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने 70 मलेरिया प्रभावित गांवो मे दवाई वाली मच्छरदानियां वितरित की गई है, जिनमें होडल ब्लाक के 27 गांव, हथीन ब्लाक के 21 गांव, अलावलपुर सीएचसी के अंतर्गत आने वाले 19 गांव व दूधौला सीएचसी के अंतर्गत आने वाले 3 गांव शामिल है। जिला पलवल मे कुल 1 लाख 58 हजार 237 मच्छरदानियां बांटी जा चुकी है। इसलिए जिन गांवो मे मच्छरदानियां बांटी गई है, वहां के सभी निवासी रात को सोते समय उनका प्रयोग करें, जिससे मच्छरों के काटने से बचा जा सके।
डेंगू व चिकिनगुनिया का उपचार व बचाव
डेंगू व चिकिनगुनिया फैलाने वाला मच्छर ऐडीज दिन में काटता है व रुके हुए साफ पानी में ही पनपता है।
डेंगू के लक्षण
अकस्मात तेज बुखार का होना, अचानक तेज सिर दर्द होना, मांसपेशियों तथा जोड़ो मे दर्द होना, आंखों के पीछे दर्द होना, जोकि आंखों को घुमाने से बढ़ता है।
चिकिनगुनिया के लक्षण
बुखार के साथ जोड़ो में दर्द व सूजन होना, कपकपी व ठंड के साथ बुखार का अचानक बढऩा, सिर दर्द होना।
क्या करे
घरो के आस-पास गड्ढïों को मिट्टïी से भरवा दें। अपने कूलर, हौदी या पानी से भरे हुए बर्तन सप्ताह में एक बार अवश्य खाली करे व कपडे से अच्छी तरह से रगडकऱ साफ करके प्रयोग करें। शरीर को ढककर रखे और मच्छररोधी दवा या क्रीम व कीटनाशक दवाई से उपचारित मच्छरदानी का उपयोग करे एवं पूरी बाजू के वस्त्र पहने। छतो पर रखी पानी की टंकियो को ढक्कन लगाकर बंद रखे। बुखार आने पर डाक्टर की सलाह अवश्य ले।
क्या न करे
स्वयं दवा न खाएं – एसप्रीन, ब्रुफिन दवाइयो का सेवन न करें। घरो के आस-पास के गड्ढïों मे 7 दिन से ज्यादा पानी इक_ा न होने दे। पुराना सामान जैसे टायर, ट्यूब, खाली डिब्बे, पॉलिथीन के लिफाफे खुले मे न फेंके ताकि बरसात का पानी उन्मे न भरे। यदि कूलर प्रयोग मे नही लाया जा रहा है तो उसमे पानी इक_ा न होने दे। हैण्डपंप या नल के आस-पास पानी जमा न होने दें। टायर, ट्यूब, खाली डिब्बे खुले मे न छोड़े।
सिविल सर्जन ने आमजन से अपील है की है कि प्रत्येक रविवार को सभी लोग ड्राई-डे (शुष्क दिवस) के रूप मे मनाएं, जिस दौरान घर के सभी कूलर व टंकियों को अच्छी तरह से कपड़े से रगडक़र साफ कर ले, फ्रिज की ट्रे का पानी जो बिजली जाने के बाद फ्रिज की बर्फ के पिघलने से ट्रे मे एकत्रित होता है। उसको जरूर साफ करे। अगर साफ करना संभव न हो तो उसमे 5 से 10 एमएल करोसिन, पेट्रोल या डीजल का तेल डाल सकते है। क्योकि फ्रिज की ट्रे के साफ पानी में डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर की उत्पत्ति होती है। घर मे प्रयोग किए जा रहे। ए.सी. के पानी को एकत्रित न होने दे, क्योकि ए.सी. के साफ एकत्रित पानी भी डेंगू फैलाने वाले मच्छर पैदा होते है, जिस पानी को निकालना संभव न हो उसमे काला तेल डाल सकते है, जिससे मच्छरों की उत्पत्ति न हो पाए। जिले मे अब तक 2 लाख 97 हजार 303 घरो की जांच स्वास्थ्य विभाग की टीमो द्वारा की जा चुकी है और जिन घरो मे मच्छर का लार्वा मिला है। उन सभी 2 हजार 72 घरो मे चेतावनी संबंधित नोटिस दिए जा चुके है और साथ मे हिदायत भी दी है कि आगे से पानी के सभी स्त्रोतों की सप्ताह मे एक बार पानी को सुखाकर अच्छी प्रकार से कपडे से रगडक़र साफ करे, जिससे मच्छरों की बढ़ोत्तरी पर रोक लग सके। जिले मे अब तक विभाग की टीमो द्वारा 1 लाख 3 हजार 879 रक्त के नमूनो की जांच की जा चुकी है, जिनमे केवल 36 मलेरिया के मामलो की पुष्टि हुई है। इसमें 4 मरीज पडोसी राज्य व पडोसी जिलो के है। इन सभी मलेरिया के मरीजो का 14 दिन का इलाज करके ठीक किया जा चुका है। इसके साथ समुदाय में आमजन से अपील है कि सभी लोगो को रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए व दिन के समय पूरी बाजू के कपडे पहनने चाहिए, जिससे मच्छर के काटने से बचा जा सके। पानी ठहरेगा जहां मच्छर पनपेगा वहां।

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