पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन और हिंसा

0
779

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने ईशनिंदा के आरोपों से एक ईसाई महिला को बरी किया तो देशभर में हंगामा शुरू हो गया। पाकिस्तान के कई शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए।

सरकार, कोर्ट और सेना के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के जजों पर तीखी टिप्पणी की गई और सेना प्रमुख के बारे में कहा गया कि वह मुसलमान ही नहीं हैं। कट्टरपंथियों ने फौज को कहना शुरू कर दिया कि वह आर्मी चीफ के खिलाफ बगावत करे।

2010 में चार बच्चों की मां आसिया का अपने मुस्लिम पड़ोसियों के साथ विवाद हो गया था। आसिया की गलती सिर्फ इतनी थी कि तेज धूप में उसे काम करते वक्त प्यास लग गई और उसने कुएं के पास मुस्लिम महिलाओं के लिए रखे गिलास से पानी पी लिया। इसके बाद मुस्लिम महिलाओं ने कहा कि गिलास अशुद्ध हो गया। आसिया अपनी पड़ोसी महिलाओं को समझाने लगीं। उन्होंने ईसा मसीह और पैगंबर मोहम्मद की तुलना कर दी। इसके बाद पड़ोसियों ने उनपर ईशनिंदा कानून के तहत मामला दर्ज कराया। पिछले आठ वर्षों से आसिया जेल में हैं।

हालात बिगड़ता देख पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को भी सामने आना पड़ा। उन्होंने एक विडियो संदेश में लोगों को समझाने की कोशिश की कि जजों ने जो फैसला दिया है वह इस्लामी कानून के मुताबिक दिया है। ऐसे में सभी को उसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने हिंसा करने पर लोगों के खिलाफ ऐक्शन लेने की चेतावनी भी दी है। आइए समझते हैं कि आखिर यह मामला क्या है, जिस पर पाकिस्तान के कट्टरपंथी भड़क गए हैं।
पानी के एक गिलास पर ईशनिंदा?

सुप्रीम कोर्ट ने ईशनिंदा की आरोपी ईसाई महिला आसिया बीबी की फांसी की सजा को पलट दिया। यह फैसला आते ही पाकिस्तान के कई शहरों की मस्जिदों से लोगों को इकट्ठा करने के ऐलान होने लगे। कुछ ही घंटों में अलग-अलग जगहों पर सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और आगजनी करने लगे। इन प्रदर्शनों के कारण ज्यादातर हाइवे बंद हो गए।

सुप्रीम कोर्ट से रिहा होने के बाद आसिया ने कहा, ‘मैं इस बात पर भरोसा नहीं कर पा रही हूं कि मुझे आजादी मिली। इस देश में हमारी जिंदगी बहुत मुश्किलों से गुजरी।’ उधर, फैसले के बाद कई जगहों पर सरकारी इमारतों और गाड़ियों को आग लगा दी गई। विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पंजाब प्रांत में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। धारा 144 लगा दी गई है। 10 नवंबर तक जनसभा करने पर भी रोक है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here